कर्नाटक: पीएसआई को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में कांग्रेस विधायक, उनके बेटे पर मामला दर्ज

कर्नाटक: पीएसआई को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में कांग्रेस विधायक, उनके बेटे पर मामला दर्ज

कर्नाटक: पीएसआई को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में कांग्रेस विधायक, उनके बेटे पर मामला दर्ज
Modified Date: August 3, 2024 / 08:50 pm IST
Published Date: August 3, 2024 8:50 pm IST

यादगिर (कर्नाटक), तीन अगस्त (भाषा) पुलिस ने एक दलित उप-निरीक्षक को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में कांग्रेस विधायक चन्नारेड्डी तन्नूर और उनके बेटे पंपनगौड़ा तन्नूर के खिलाफ शनिवार को मामला दर्ज किया।

पुलिस उप-निरीक्षक ने तैनाती के सात महीने के भीतर उनका तबादला कर देने के बाद कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी।

परशुराम की पत्नी श्वेता एन.वी. की शिकायत पर विधायक और उनके बेटे पर शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करने, आत्महत्या के लिए उकसाने समेत प्रासंगिक धाराओं में मामला दर्ज किया गया।

श्वेता ने आरोप लगाया कि पिता-पुत्र ने उनके पति से तबादला नहीं हो इसके ऐवज में 30 लाख रुपये की मांग की थी। उन्होंने दावा किया कि परशुराम तबादले के बाद से ही रो रहे थे और उन्होंने (परशुराम) बताया था कि वह आत्महत्या करने की सोच रहे हैं।

जब गर्भवती श्वेता अपने बच्चे के जन्म के लिए अपने मायके रायचूर गईं, तो उन्हें पता चला कि परशुराम को नाक और मुंह से खून बहने के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

घटना के बाद दलित संघर्ष समिति के सदस्यों ने परशुराम के लिए न्याय की मांग करते हुए सड़क जाम कर प्रदर्शन किया। श्वेता भी प्रदर्शन में शामिल हुई।

मीडिया को संबोधित करते हुए श्वेता ने आरोप लगाया कि पुलिस विभाग उनके पति का नहीं बल्कि विधायक का समर्थन कर रहा है।

घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि उन्होंने मामले की गहन जांच के आदेश दिए हैं। हालांकि, उन्होंने इस बात से इनकार किया कि यह आत्महत्या थी।

मंत्री ने बेंगलुरु में संवाददाताओं से कहा, ‘‘उन्होंने (परशुराम) आत्महत्या नहीं की। उन्होंने कोई सुसाइड नोट नहीं लिखा था। उनकी पत्नी ने शिकायत की है कि वह तबादले को लेकर परेशान थे। मैं उनके आरोप पर गौर करूंगा। जांच में उस पहलु को भी ध्यान में रखा जाएगा।’’

परमेश्वर ने कहा कि पुलिस प्रारंभिक जानकारी एकत्र कर जांच कर रही है।

इस घटना ने राजनीतिक मोड़ ले लिया तथा विपक्षी भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) ने ईमानदार अधिकारियों को ‘‘आत्महत्या के लिए मजबूर करने’’ के लिए सरकार की आलोचना की।

केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने बेंगलुरु में भाजपा और जद (एस) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित ‘‘मैसूरु चलो’’ मार्च की शुरुआत पर कहा, ‘‘… एक पुलिस उपनिरीक्षक ने आत्महत्या कर ली है। उन्होंने ऐसा क्यों किया? उनकी पत्नी का आरोप है कि उप-निरीक्षक ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि वह विधायक को 25 लाख रुपये की रिश्वत नहीं दे पाये।’’

भाषा

शफीक पवनेश

पवनेश


लेखक के बारे में