कर्नाटक सरकार ने ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के भूमि अतिक्रमण की जांच के लिए एसआईटी बनाई

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कर्नाटक सरकार ने ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के भूमि अतिक्रमण की जांच के लिए एसआईटी बनाई

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  • Publish Date - July 21, 2026 / 04:36 PM IST,
    Updated On - July 21, 2026 / 04:36 PM IST

बेंगलुरु, 21 जुलाई (भाषा) कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु दक्षिण तालुक के कग्गलिपुरा गांव और उसके आस-पास सरकारी जमीन पर श्री श्री रविशंकर की संस्था ‘आर्ट ऑफ लिविंग’, उससे संबंधित संगठनों और अन्य पक्षों के कथित कब्जे की व्यापक जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। समिति को तीन महीने के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।

राजस्व विभाग ने कर्नाटक भूमि राजस्व अधिनियम, 1964 और कर्नाटक भूमि कब्जा रोक अधिनियम, 2011 के तहत 17 जुलाई को यह आदेश जारी किया था, जिसे मंगलवार को राजस्व मंत्री के कार्यालय ने साझा किया।

क्षेत्रीय आयुक्त अम्मन आदित्य बिस्वास की अध्यक्षता वाली एसआईटी में वरिष्ठ राजस्व अधिकारी, भूमि अभिलेख अधिकारी, मुकदमेबाजी प्रबंधन सलाहकार के रूप में काम कर रहे एक सेवानिवृत्त जिला और सत्र न्यायाधीश तथा अन्य अधिकारी शामिल हैं। येलाहंका के तहसीलदार कलीमुल्ला को सदस्य-सचिव बनाया गया है।

आदेश के अनुसार, एसआईटी कग्गलिपुरा और आस-पास के गांवों के सर्वे नंबर 46 से जुड़े आरोपों की जांच करेगी। इसमें वेद विज्ञान महा विद्यापीठ संस्थान, सुमेरु ग्लोबल सपोर्ट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, सुमेरु रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड, रिट याचिका में अन्य प्रतिवादियों और सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले किसी भी अन्य व्यक्ति या संस्थान के खिलाफ दावों की जांच शामिल है।

इसमें कहा गया है कि अक्टूबर 2025 में भूमि अभिलेखों के सहायक निदेशक द्वारा किए गए सर्वेक्षण से ‘‘प्रथम दृष्टया पता चला है कि ‘द आर्ट ऑफ़ लिविंग’ के ट्रस्टियों ने कुछ अन्य व्यक्तियों के साथ मिलकर, सरकारी पट्टा समझौतों और भूमि अनुदान प्राप्तकर्ताओं के साथ व्यवस्थाओं (जिसमें कथित तौर पर संदिग्ध अनुदान दस्तावेज भी शामिल हैं) के माध्यम से 290 एकड़ से अधिक सरकारी गोमाला (चरागाह) भूमि पर व्यवस्थित रूप से, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कब्ज़ा किया था।’’

भाषा वैभव नरेश

नरेश