कर्नाटक सरकार जाति आधारित गणना पर उच्च न्यायालय के निर्देश का पालन करेगी: मंत्री शिवराज तंगदागी

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कर्नाटक सरकार जाति आधारित गणना पर उच्च न्यायालय के निर्देश का पालन करेगी: मंत्री शिवराज तंगदागी

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  • Publish Date - September 26, 2025 / 03:54 PM IST,
    Updated On - September 26, 2025 / 03:54 PM IST

बेंगलुरु, 26 सितंबर (भाषा) कर्नाटक के पिछड़ा वर्ग विकास मंत्री शिवराज एस तंगदागी ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में कराए जा रहे सामाजिक और शैक्षिक सर्वेक्षण (जिसे आमतौर पर ‘जाति आधारित गणना’ के नाम से जाना जाता है) के संबंध में उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करेगी।

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को सर्वेक्षण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था, लेकिन राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग को एकत्रित आंकड़ों की गोपनीयता बनाए रखने और नागरिकों की स्वैच्छिक भागीदारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।

कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा किया जा रहा यह सर्वेक्षण सोमवार को शुरू हुआ और सात अक्टूबर तक चलेगा।

गोपनीयता बनाए रखने के उच्च न्यायालय के आदेश के बारे में पूछे जाने पर तंगदागी ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘कानून का पालन करना हमारा कर्तव्य और जिम्मेदारी है। हम अदालत के निर्देश का पालन करेंगे।’’

क्या सर्वेक्षण में लोगों की भागीदारी अनिवार्य है? इस सवाल पर उन्होंने कहा, ‘‘हमने (सरकार ने) भी यही कहा है, हमने कहा है कि सर्वेक्षण में भागीदारी स्वैच्छिक है। हमने पहले भी कोई बाध्यता नहीं रखी है और भविष्य में भी नहीं रखेंगे।’’

मंत्री ने कहा कि कैबिनेट ने सर्वेक्षण के लिए नियुक्त सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को चेतावनी दी है कि अगर वे गणना प्रक्रिया में भाग नहीं लेते हैं, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

तकनीकी और सर्वर संबंधी समस्याओं के कारण डेटा संग्रह का काम प्रभावित होने के कारण सर्वेक्षण की धीमी गति को लेकर चिंताएं जताई गई हैं।

सूत्रों ने बताया कि घरों का दौरा करने वाले गणनाकर्ताओं को कई क्षेत्रों में सर्वेक्षण के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले मोबाइल एप्लिकेशन में समस्याओं का सामना करना पड़ा है, जिसमें सर्वर में बाधा आना, ओटीपी जेनरेशन में विफलता और नेटवर्क कनेक्टिविटी से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं।

सर्वेक्षण को प्रभावित करने वाली तकनीकी गड़बड़ियों के बारे में पूछे जाने पर तंगादागी ने कहा, ‘‘इन्हें ठीक कर लिया जाएगा।’’

सर्वेक्षण में लगभग 1.75 लाख गणनाकर्ता शामिल होंगे, जिनमें से अधिकांश सरकारी स्कूल के शिक्षक होंगे। सर्वेक्षण में राज्य भर के लगभग दो करोड़ घरों के करीब सात करोड़ लोगों को कवर किया जाएगा।

अधिकारियों ने बताया कि इस सर्वेक्षण पर 420 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है और यह कार्य 60 प्रश्नों वाली प्रश्नावली के साथ ‘वैज्ञानिक रूप से’ किया जा रहा है। आयोग द्वारा दिसंबर तक सरकार को रिपोर्ट सौंपे जाने की उम्मीद है।

भाषा संतोष दिलीप

दिलीप