बेंगलुरु, 18 अगस्त (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने मंगलवार को कहा कि राज्य अपने युवाओं के कौशल की बदौलत नये शोध के लिए वैश्विक केंद्र के रूप में उभरा है और कौशल ऐसी संपत्ति है, जिसे कोई चुरा नहीं सकता।
विधान सौध के बैंक्वेट हॉल में विश्व युवा कौशल दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिवकुमार ने कहा कि देश को प्रगति करनी है तो शिक्षा के साथ कौशल भी जरूरी है।
उन्होंने कहा, ‘‘कौशल का अर्थ बुद्धिजीवियों और उपलब्धि हासिल करने वालों का संगम है। कौशल को कोई चुरा नहीं सकता। यहां के युवाओं के कौशल की बदौलत कर्नाटक दुनिया में नये शोध का केंद्र बन गया है।’’
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘अगर देश को अधिक जागरूक और सक्षम बनना है तो शिक्षा के साथ कौशल भी होना चाहिए। कौशल का होना राजयोग जैसा है, इसे कोई चुरा नहीं सकता।’’
उन्होंने कहा कि कैलिफोर्निया में सूचना प्रौद्योगिकी के 13 लाख इंजीनियर हैं, जबकि अकेले बेंगलुरु में ही सूचना प्रौद्योगिकी के 25 लाख पेशेवर हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति में कोई न कोई कौशल होता है। उन्होंने सुनारों और बढ़ई का उदाहरण देते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक उपलब्ध होने से पहले कैदियों ने भी विधान सौध के निर्माण में योगदान दिया था।
शिवकुमार ने कहा कि टाटा और महिंद्रा समूहों के प्रमुख जैसे उद्योगपतियों ने बेंगलुरु में शिक्षा हासिल करने के साथ अपने कौशल को विकसित किया और बाद में अपने कारोबार का दुनिया भर में विस्तार किया।
उन्होंने छात्रों से कहा, ‘‘अपनी प्रतिस्पर्धा बेलगावी, हुब्बली या धारवाड़ तक सीमित न रखें, आपको वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए।’’
भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) के इतिहास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने समुद्री यात्रा के दौरान जमशेदजी टाटा से भारत की गरीबी के बारे में चर्चा की थी और इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे कि विज्ञान के जरिए गरीबी दूर की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि इसके बाद विवेकानंद ने मैसुरु के तत्कालीन महाराजा से संपर्क किया, जिसके परिणामस्वरूप 360 एकड़ भूमि में आईआईएससी की स्थापना हुई। उन्होंने कहा कि इस संस्थान ने तब से अब तक लाखों प्रतिभाशाली वैज्ञानिक तैयार किए हैं।
शिवकुमार ने कहा, ‘‘ कौशल को कोई चुरा नहीं सकता। मेरा अधिकार और पद एक दिन खत्म हो सकता है, लेकिन मेरे भीतर का कौशल खत्म नहीं होगा। इसके अलावा, हम जो शिक्षा हासिल करते हैं, वह कभी खत्म नहीं होती।’’
उन्होंने कहा कि डिग्री हासिल करने का मतलब जरूरी नहीं कि व्यक्ति के पास कौशल या सामान्य समझ भी हो। उन्होंने किसानों का उदाहरण देते हुए कहा कि वे खेतों में सीधी कतार में हल चलाते हैं और महिलाएं बिना इंजीनियरों से सीखे या पैमाने का इस्तेमाल किए सटीक तरीके से फसल रोपती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘अगर आपके हाथों में कौशल है तो आपके पास आजीविका का साधन है। कौशल के साथ आप कहीं भी अपना जीवन चला सकते हैं।’’
उन्होंने छात्रों से नवंबर में होने वाले बेंगलुरु तकनीकी शिखर सम्मेलन में शामिल होने का आग्रह किया और कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता विश्वविद्यालय स्थापित करने की योजना बना रही है।
शिवकुमार ने कहा कि सरकार निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसरों की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए एक नयी ‘युवा सेतु’ (उद्योग सेतु) योजना शुरू करने पर विचार कर रही है।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित मंच पर निजी क्षेत्र के नियोक्ता अपनी रिक्तियों की जानकारी साझा करेंगे। अपने भाषण के दौरान छात्रों द्वारा तालियों के साथ सीटी बजाने पर शिवकुमार ने उनसे अनुशासन बनाए रखने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा, ‘‘तालियां बजाइए, लेकिन सीटी मत बजाइए।’’
उन्होंने याद किया कि वह सिनेमाघरों में डॉ. राजकुमार की फिल्में देखते समय सीटी बजाया करते थे।
उन्होंने कहा, ‘‘पक्षियों की सीटी अच्छी लगती है, क्योंकि वे दूसरे पक्षियों को बुलाने के लिए ऐसा करते हैं। यहां ऐसा मत कीजिए। अनुशासन बनाए रखिए।’’
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