कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 52 आपराधिक मामले वापस लेने के राज्य मंत्रिमंडल के फैसले पर रोक लगाई

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कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 52 आपराधिक मामले वापस लेने के राज्य मंत्रिमंडल के फैसले पर रोक लगाई

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  • Publish Date - July 2, 2026 / 04:08 PM IST,
    Updated On - July 2, 2026 / 04:08 PM IST

बेंगलुरु, दो जुलाई (भाषा) कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को राज्य मंत्रिमंडल के उस फैसले पर रोक लगा दी जिसके तहत 52 आपराधिक मामलों में मुकदमा वापस लिया जाना था। इनमें 2022 के अलंद लाडले मशक दरगाह दंगे से जुड़े मामले भी शामिल हैं।

मुख्य न्यायाधीश विभु बाखरू और न्यायमूर्ति के.एस. हेमलेखा की पीठ ने प्रथम दृष्टया पाया कि आरोपियों के खिलाफ मुकदमे वापस लेने के लिए राज्य द्वारा सीआरपीसी की धारा 321 का इस्तेमाल करना, उच्च न्यायालय के पहले के आदेश का उल्लंघन है।

अदालत ने राज्य सरकार और अभियोजन निदेशालय को नोटिस जारी किया और उन्हें दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

वकील गिरीश भारद्वाज ने अदालत में याचिका दायर करके 27 मई के उस सरकारी आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया था जिसमें सरकारी वकीलों को न्याय के हित में राज्य के विभिन्न पुलिस थानों में दर्ज मामलों को वापस लेने का निर्देश दिया गया था।

उन्होंने यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया कि 21 मई के मंत्रिमंडल के फैसले और उससे जुड़े सभी रिकॉर्ड मंगाकर उन्हें रद्द किया जाए, और साथ ही न्याय के हित में उसके आधार पर जारी किए गए सभी आदेशों, अधिसूचना, सूचनाओं और निर्देशों को भी रद्द किया जाए।

कर्नाटक मंत्रिमंडल ने 21 मई को किसानों और कन्नड़-समर्थक कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज मामलों सहित 52 आपराधिक मामलों में मुकदमा वापस लेने का फैसला किया।

कलबुर्गी जिले के अलंद में हुई हिंसा से जुड़े कम से कम आठ मामलों को भी वापस लेने का निर्णय लिया गया।

विपक्षी भाजपा ने अलंद हिंसा से जुड़े मामलों को वापस लेने के लिए कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि सरकार ‘‘तुष्टिकरण की राजनीति’’ के लिए कानून के शासन से समझौता कर रही है।

अलंद का मामला एक मार्च, 2022 का है, जब भाजपा के कुछ कार्यकर्ता दरगाह के अंदर शिवलिंग का शुद्धिकरण अनुष्ठान करना चाहते थे; उनका आरोप था कि शिवलिंग को अपवित्र किया गया था। इस मुद्दे के कारण सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई, जिसके बाद इलाके में निषेधाज्ञा लागू की गई थी।

भाषा शफीक नरेश

नरेश