कर्नाटक के मंत्री ने तीन राज्यों के बीच महादयी जल विवाद का ‘भाईचारे’ से समाधान करने की अपील की
कर्नाटक के मंत्री ने तीन राज्यों के बीच महादयी जल विवाद का 'भाईचारे' से समाधान करने की अपील की
पणजी, 18 अगस्त (भाषा) कर्नाटक के कृषि मंत्री पी.एम. नरेंद्र स्वामी ने मंगलवार को अपने राज्य, गोवा और महाराष्ट्र के बीच दशकों से जारी महादयी जल विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने की अपील करते हुए कहा कि इस मुद्दे को ‘‘भाईचारे की भावना’’ से सुलझाया जाना चाहिए।
दक्षिण गोवा में पत्रकारों से बात करते हुए स्वामी ने कहा कि पड़ोसी राज्यों के बीच यह विवाद नया नहीं है और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उन्हें बातचीत के जरिए इसका समाधान निकालना चाहिए, खासकर पीने के पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए।
उन्होंने कहा, ‘‘यह राज्यों के बीच का विवाद है, जो आज से नहीं है। इसे मैत्रीपूर्ण तरीके से सुलझाया जाना चाहिए। भाई-भाई जैसे राज्यों को कम से कम पीने के पानी के लिए तो यह समस्या सुलझानी ही चाहिए।’’
हालांकि, स्वामी ने विवाद के गुण-दोष पर विस्तार से टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि मामला अभी उच्चतम न्यायालय में लंबित है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह मामला अदालत में है। अदालत को ही फैसला करने दें।’’
मंत्री का यह बयान गोवा, कर्नाटक और महाराष्ट्र के बीच महादयी नदी के जल बंटवारे को लेकर लंबे समय से जारी विवाद के बीच आया है। यह विवाद मुख्य रूप से कर्नाटक की प्रस्तावित ‘कलसा-बंदुरा’ परियोजना को लेकर है, जिसका मकसद उत्तरी कर्नाटक में पेयजल की जरूरतों को पूरा करने के लिए महादयी बेसिन से पानी को मलाप्रभा बेसिन की ओर ले जाना है।
वर्ष 2010 में गठित महादयी जल विवाद न्यायाधिकरण ने 2018 में अपना अंतिम फैसला सुनाया, जिसमें तीनों राज्यों के बीच पानी का बंटवारा किया गया। इसके बाद यह मामला उच्चतम न्यायालय पहुंचा, जहां न्यायाधिकरण के फैसले और प्रस्तावित परियोजना से जुड़ी कई कानूनी कार्यवाही अभी लंबित है।
स्वामी ने कहा कि राज्यों के बीच जल विवादों को सुलझाते समय लोगों की पेयजल की जरूरतों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर आपको प्यास लगी हो, तो क्या आपको पानी की जरूरत नहीं होगी? अगर अत्यधिक बारिश हो, तो क्या आप उस पानी को रोककर रख सकते हैं?’’
उनके मुताबिक, कर्नाटक को भी सूखे का सामना करना पड़ा है और पानी के लिए पड़ोसी राज्यों से मदद लेनी पड़ी है।
स्वामी ने कहा, ‘‘जब सूखे की समस्या होती है, तो हम पड़ोसी राज्यों से मदद मांगते हैं। हम भारत में हैं, इसलिए हमें एक-दूसरे की समस्याओं को साझा करना चाहिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह दोनों पक्षों का फैसला है, यह तीन राज्यों का मामला है और इसे अदालत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए। हम सभी भाई-भाई जैसे राज्य हैं। हम प्राकृतिक संसाधनों को साझा करते हैं। जरूरतमंद लोगों की समस्याओं पर विचार किया जाना चाहिए।’’
महादयी नदी कर्नाटक से निकलती है और अरब सागर में जाने से पहले गोवा से होकर बहती है। गोवा इसके पानी को दूसरी तरफ मोड़ने का लगातार विरोध करता रहा है। उसका तर्क है कि इससे पानी की सुरक्षा और पर्यावरण पर बुरा असर पड़ेगा। वहीं, कर्नाटक का कहना है कि पानी को दूसरी तरफ मोड़ने का मकसद मुख्य रूप से उसके उत्तरी जिलों में पेयजल की जरूरत को पूरा करना है, जहां पानी की कमी है।
भाषा सुभाष माधव
माधव

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