बेंगलुरु, 10 जून (भाषा) कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे ने बुधवार को उस कानूनी प्रावधान पर सवाल उठाया जिसके तहत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को सरकार के पास पंजीकरण और जवाबदेही से छूट मिली हुई है।
प्रियंक ने कहा कि वह इस मामले को समझने के लिए संगठन के मुख्यालय जाने को तैयार हैं। मंत्री ने आरएसएस नेताओं को उनके कार्यालय आने का न्योता भी दिया, ताकि वे छूट की कानूनी स्थिति या प्रावधानों के बारे में बता सकें।
प्रियंक ने कहा कि वह आरएसएस नेताओं के स्पष्टीकरण का मूल्यांकन करेंगे और अगर वह गलत हुए तो माफी मांगेंगे।
एक सवाल के जवाब में प्रियंक ने कहा, ‘‘पंजीकरण करने के लिये कहे जाने पर वे क्यों डरते हैं? जब हम आरएसएस को पंजीकरण करने के लिए कहते हैं, तो भाजपा क्यों बोलती है? वे मुझे जगन्नाथ भवन (भाजपा का प्रदेश मुख्यालय) या केशव कृपा (आरएसएस का प्रदेश मुख्यालय) बुला लें। वे मुझे वह कानून दिखाएं जिसके तहत उन्हें सरकार या सरकारी एजेंसियों के प्रति जवाबदेह होने से छूट मिली हुई है।’’
संवाददाताओं से बात करते हुए मंत्री ने कहा, ‘‘या फिर वे दस्तावेजों के साथ मेरे कार्यालय आएं। वे दिखाएं कि कौन-सा कानून उन्हें संवैधानिक प्रावधानों या कानूनों का पालन करने से छूट देता है। मैं इसकी जांच करूंगा, और अगर मैं गलत हुआ तो माफी मांगूंगा। वरना, उन्हें अपनी गलती सुधारनी होगी।’’
भाजपा पर तंज कसते हुए, मंत्री प्रिंयक ने सोमवार को पार्टी से कहा था कि वह अपने ‘‘राजनीतिक आकाओं’’ यानी आरएसएस से अपने पंजीकरण के दस्तावेज तैयार रखने को कहे।
नवंबर 2025 में, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कांग्रेस नेताओं की उस आलोचना का परोक्ष रूप से जवाब दिया जिसमें संगठन के बिना पंजीकरण के काम करने पर सवाल उठाए गए थे। भागवत ने कहा था कि आरएसएस को व्यक्तियों के एक समूह के तौर पर मान्यता प्राप्त है।
भाषा शफीक नरेश
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