नयी दिल्ली, छह अगस्त (भाषा) केंद्र की महत्वाकांक्षी सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास योजना के तहत बने ‘कर्तव्य भवन-3’ ने पुरानी इमारत की तुलना में बिजली और पानी की खपत में काफी बचत की है। यह बात आधिकारिक आंकड़ों में कही गई है।
केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्री मनोहरलाल के कार्यालय ने कहा कि कर्तव्य भवन ‘नए भारत’ के भविष्य के लिए तैयार सरकारी अवसंरचना का एक बेहतरीन उदाहरण है।
मंत्री के कार्यालय ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘विश्वस्तरीय हरित इमारत विशेषता के साथ निर्मित किए गए इस परिसर में 76 प्रतिशत कम बिजली खर्च होती है, जिससे एक ही ब्लॉक में हर महीने लगभग 4.45 लाख यूनिट की बचत होती है। साथ ही, यह हर दिन लगभग 3 लाख लीटर पानी के पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग करके ताजा पानी की खपत में 49 प्रतिशत की कटौती करता है।’’
इसमें कहा गया कि कि ऊर्जा दक्षता प्रणाली, शून्य कचरा वाले परिसर और स्मार्ट संसाधन प्रबंधन के साथ, कर्तव्य भवन सिर्फ एक प्रशासनिक कार्यालय नहीं है बल्कि यह आधुनिक, सतत और नागरिक-केंद्रित शासन का प्रतीक है, जो ‘विकसित भारत’ के दृष्टिकोण को आगे बढ़ा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले साल 6 अगस्त को कर्तव्य भवन-3 का उद्घाटन किया था। यह सरकार की सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास योजना के तहत बनाई जा रही 10 ‘कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट’ इमारतों में से पहली थी।
अब तक इस तरह की तीन नयी इमारतों को उपयोग में लाना शुरू कर दिया गया है, जबकि सात इमारत अभी निर्माणाधीन हैं।
सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास योजना के तहत, सरकार पहले ही नया संसद भवन और उपराष्ट्रपति एन्क्लेव बना चुकी है, तथा विजय चौक से इंडिया गेट तक कर्तव्य पथ का पुनर्विकास कर चुकी है।
‘कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट’ के अलावा, सरकार एक ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव’ भी बनाएगी जिसमें प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ), कैबिनेट सचिवालय, इंडिया हाउस और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय होंगे।
‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव’ के दूसरे चरण में, नया प्रधानमंत्री आवास बनाया जाएगा।
भाषा सुभाष नेत्रपाल
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