कार्ति चिदंबरम ने राष्ट्रगीत पर कांग्रेस के रुख का बचाव किया

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कार्ति चिदंबरम ने राष्ट्रगीत पर कांग्रेस के रुख का बचाव किया

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  • Publish Date - August 24, 2026 / 02:08 PM IST,
    Updated On - August 24, 2026 / 02:08 PM IST

मदुरै, 24 अगस्त (भाषा) कांग्रेस सांसद कार्ति पी चिदंबरम ने सोमवार को ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर अपनी पार्टी के रुख का बचाव करते हुए कहा कि कांग्रेस की “राष्ट्रवाद और देशभक्ति की लंबी विरासत” रही है और उसे भाजपा से कोई सीख लेने की जरूरत नहीं है।

कार्ति ने यहां संवाददाताओं के समक्ष ‘वंदे मातरम्’ के केवल दो अंतरों को गाए जाने को लेकर भाजपा द्वारा “सवाल उठाए जाने” पर निशाना साधा।

उन्होंने कहा, “हम राष्ट्रवादी हैं। हम ऐसी पार्टी से आते हैं जिसकी राष्ट्रवाद और देशभक्ति की लंबी विरासत रही है। इसलिए भाजपा को हम पर कोई आक्षेप नहीं लगाना चाहिए।”

‘वंदे मातरम्’ के केवल दो अंतरों के गायन को लेकर हो रही आलोचना पर उन्होंने कहा, “भाजपा को इतिहास पढ़ना चाहिए… महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे दिग्गजों ने सामूहिक रूप से यह फैसला किया था कि केवल दो अंतरे ही हमारे राष्ट्रीय गीत के रूप में उपयुक्त और पर्याप्त होंगे।”

अभिनेता से नेता बने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय को प्रधानमंत्री बनाने की मांग कर रहे उनके प्रशंसकों के बारे में पूछे जाने पर कांग्रेस नेता ने कहा कि शीर्ष पद हासिल करने के लिए 272 सांसदों का समर्थन जरूरी है।

उन्होंने कहा, “जो भी राजनीतिक गठबंधन यह संख्या हासिल करेगा, उसका नेता प्रधानमंत्री बनेगा।”

अभिनेता धनुष के राजनीति में आने की संभावना को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने संक्षिप्त जवाब दिया, “मैं उनकी फिल्में नहीं देखता।”

मेकेदातू बांध के विवादास्पद मुद्दे और तमिलनाडु तथा पुडुचेरी पर इसके प्रभाव को लेकर कार्ति ने कहा कि कावेरी प्रबंधन बोर्ड के अनुसार तमिलनाडु को हर साल कावेरी नदी के पानी में उसका उचित हिस्सा लगातार मिलते रहना जरूरी है।

कार्ति ने हिरासत में होने वाली मौतों और ‘ऑनर किलिंग’ की घटनाओं पर गहरी चिंता जताई।

उन्होंने हिरासत में होने वाली मौतों के लिए “पुलिस की मानसिकता” को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया कि पुलिस अब भी “औपनिवेशिक बल” की तरह व्यवहार करती है और पूछताछ के लिए क्रूर तथा ‘थर्ड डिग्री’ तरीकों का इस्तेमाल करती है।

उन्होंने पुलिस प्रशिक्षण नियमावली में पूरी तरह बदलाव करने और कांस्टेबल से लेकर पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तक के सभी स्तरों पर मनोवैज्ञानिक प्रशिक्षण लागू करने की मांग की।

भाषा

राखी वैभव

वैभव