कश्मीर: राजौरी की भैरव यात्रा को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल किया गया

कश्मीर: राजौरी की भैरव यात्रा को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल किया गया

कश्मीर: राजौरी की भैरव यात्रा को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल किया गया
Modified Date: July 15, 2026 / 03:56 pm IST
Published Date: July 15, 2026 3:56 pm IST

जम्मू, 15 जुलाई (भाषा) जम्मू-कश्मीर के राजौरी की भैरव यात्रा को आधिकारिक तौर पर भारत की राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल कर लिया गया है।

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इसे ‘गर्व का क्षण’ बताया और यह प्रतिष्ठित मान्यता दिलाने के लिए राजौरी प्रशासन तथा जम्मू-कश्मीर के संस्कृति विभाग को बधाई दी।

राजौरी की सदियों पुरानी भैरव यात्रा सीमावर्ती जिले के मुख्य बाजारों में हर साल होली से ठीक पहले निकाली जाने वाली एक शोभायात्रा है।

भगवान काल भैरव को समर्पित यह जीवंत उत्सव क्षेत्र की गहरी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को संजोए हुए है।

उपराज्यपाल ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “राजौरी के लिए गर्व का क्षण! जिले की ऐतिहासिक भैरव यात्रा को आधिकारिक तौर पर भारत की राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल कर लिया गया है।”

उन्होंने कहा, “इस सपने को साकार करने के लिए राजौरी जिला प्रशासन और जम्मू-कश्मीर के संस्कृति विभाग को बधाई। यह प्रतिष्ठित मान्यता क्षेत्र की गहरी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के दस्तावेजीकरण, संरक्षण और उत्सव को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।”

उपराज्यपाल ने कहा कि यह राष्ट्रीय सम्मान उन पीढ़ियों के श्रद्धालुओं के समर्पण की पुष्टि करता है, जिन्होंने इस परंपरा को जीवित रखा।

सिन्हा ने कहा, “राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में भैरव यात्रा को शामिल किए जाने से राष्ट्रीय स्तर पर राजौरी की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और मजबूत होगी। साथ ही इससे शोध, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और विरासत पर्यटन के नए अवसर खुलेंगे।”

भाषा जितेंद्र शफीक

शफीक


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