हैदराबाद, एक सितंबर (भाषा) तेलंगाना रक्षा सेना (टीआरएस) की प्रमुख के. कविता अपने खिलाफ दिल्ली आबकारी नीति मामले का जिक्र करते हुए भावुक हो गईं और उन्होंने आरोप लगाया कि कोई गलत काम नहीं करने के बावजूद उन्हें परेशान किया गया।
कविता को इस मामले में 2024 में जेल जाना पड़ा था।
कविता ने तेलंगाना के निजामाबाद में सोमवार को एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें उनके पिता के. चंद्रशेखर राव के नेतृत्व वाली भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) से बाहर कर दिया गया।
कविता इससे पहले निजामाबाद से लोकसभा सदस्य रह चुकी हैं। उन्होंने कहा कि जनता के आशीर्वाद से वह सांसद एवं विधान परिषद सदस्य चुनी गईं और उन्हें सत्ता की लालसा नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे दिल्ली की तिहाड़ जेल में क्यों डाला गया? वहां न हमारी भाषा है, न हमारे लोग। मैंने क्या गलती की थी? मैं इस जिले की बहू हूं। मुझे तिहाड़ जेल में डाला गया, लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मुझे चार साल तक परेशान किया लेकिन मैंने हर बार कहा कि मैंने कोई गलती नहीं की है।’’
कविता ने दावा किया कि अदालत ने कहा है कि जिस मामले में उन पर आरोप लगे थे उसकी जांच करने वाले अधिकारी के खिलाफ जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह एकमात्र ऐसा मामला है जिसमें अदालत ने इस तरह की टिप्पणी की है।
कविता ने आम लोगों के जीवन में बदलाव लाने के लिए समर्पित ‘‘बहुजन तेलंगाना’’ बनाने की वकालत की।
उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पिता के. चंद्रशेखर राव के नेतृत्व वाली बीआरएस सरकार के दौरान निर्मित कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई योजना पर एक लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाने के बावजूद निजामाबाद में एक एकड़ जमीन को भी पानी नहीं मिला।
कविता ने अपने ‘पंचजन्यम’ वादे का भी जिक्र किया जिसमें मुफ्त शिक्षा, मुफ्त स्वास्थ्य सेवा, कृषि एवं किसान कल्याण, बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन और सामाजिक न्याय शामिल हैं।
भाषा सिम्मी वैभव
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