‘लॉकडाउन’ में किराया देने का केजरीवाल का आश्वासन लागू कराने योग्य नहीं: अदालत

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‘लॉकडाउन’ में किराया देने का केजरीवाल का आश्वासन लागू कराने योग्य नहीं: अदालत

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  • Publish Date - April 6, 2026 / 09:52 PM IST,
    Updated On - April 6, 2026 / 09:52 PM IST

नयी दिल्ली, छह अप्रैल (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि मार्च 2020 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के कारण लागू लॉकडाउन के दौरान गरीब किरायेदारों की ओर से किराया देने का जो आश्वासन दिया था उसे लागू नहीं कराया जा सकता, क्योंकि उनके इस बयान के बाद कोई आधिकारिक कार्रवाई नहीं की गई थी।

न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर और न्यायमूर्ति ओ. पी. शुक्ला की पीठ ने दिल्ली सरकार की याचिका पर यह फैसला सुनाया। दिल्ली सरकार ने एकल न्यायाधीश के 2021 के उस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी जिसमें कहा गया था कि मुख्यमंत्री की यह घोषणा लागू कराने योग्य है।

पीठ ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री द्वारा दिया गया मात्र एक बयान कानूनन लागू करने योग्य नहीं होगा, भले ही जिन नागरिकों के लिए वह बयान दिया गया हो, वे उस पर भरोसा करते हैं।’’

उसने कहा, ‘‘चूंकि राज्य निधि से किराया चुकाने का आश्वासन किसी लिखित दस्तावेज, कार्यालय ज्ञापन, अधिसूचना, परिपत्र या कानून के समान प्रभावी किसी अन्य दस्तावेज में दर्ज नहीं किया गया था इसलिए इसे केवल संवाददाता सम्मेलन के दौरान दिए गए बयान के आधार पर लागू नहीं किया जा सकता।’’

खंडपीठ ने कहा कि केजरीवाल द्वारा 29 मार्च, 2020 को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में गरीब किरायेदारों की ओर से राज्य के स्तर पर किराया दिए जाने की घोषणा किसी कानूनी प्रावधान से समर्थित नहीं थी।

अदालत ने कहा कि लॉकडाउन की अवधि के दौरान प्रवासियों के किराए का भुगतान राज्य द्वारा करने के आश्वासन के संबंध में कोई आधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण इसे लागू नहीं किया जा सकता।

दिल्ली सरकार ने दलील दी कि एकल न्यायाधीश के समक्ष दायर याचिकाएं सुनवाई योग्य नहीं थीं, क्योंकि उनमें एक नेता के बयान को लागू कराने का अनुरोध किया गया था जबकि उसके समर्थन में सरकार का कोई कानून या नीति नहीं थी।

भाषा

सिम्मी माधव

माधव