तिरुवनंतपुरम, पांच फरवरी (भाषा) कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी दलों के गठबंधन संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के सदस्यों ने शबरिमला मंदिर से कथित तौर पर सोना गायब होने के विरोध में और राज्य के देवस्वओम मंत्री वी एन वासवन के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार तीसरे दिन बृहस्पतिवार को केरल विधानसभा की कार्यवाही बाधित की।
विपक्ष के व्यवधान के कारण अध्यक्ष ए. एन. शमसीर ने प्रश्नकाल रद्द कर दिया और सदन के अन्य कार्यों को शुरू किया।
सदन ने अपना कामकाज जल्दी पूरा कर लिया जिसमें सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा पेश की गई अनुदान संबंधी कई मांगों को पारित करना और विकसित भारत – ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (वीबी-जी राम जी) योजना को वापस लेने तथा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) योजना को बहाल करने की मांग वाला एक प्रस्ताव पारित करना शामिल था। इसके बाद सुबह नौ बजकर 50 मिनट पर सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि सदन की कार्यवाही 23 फरवरी को फिर से शुरू होगी।
सुबह नौ बजे विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने पर राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता वी डी सतीशन ने अध्यक्ष को बताया कि यूडीएफ इस मुद्दे पर सदन के अंदर और बाहर अपना विरोध जारी रखेगा।
उन्होंने कहा कि शबरिमला सोना गायब होने के मामलों में गिरफ्तार किए गए कई लोग विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा आरोप पत्र दाखिल नहीं किए जाने के कारण वैधानिक जमानत पर बाहर आ गए हैं।
विपक्ष के नेता ने कहा कि यूडीएफ को आशंका है कि आरोपी के बाहर आने पर वे मामले से जुड़े सभी सबूतों को नष्ट कर देंगे क्योंकि एसआईटी की जांच पूरी नहीं हुई है और संबंधित सामग्री एकत्र नहीं की गई है।
सतीशन ने यह भी कहा कि सदन में विपक्ष का विरोध शांतिपूर्ण था और उन्होंने सुरक्षाकर्मियों पर हमला नहीं किया।
शमसीर ने कहा कि मंगलवार को विपक्ष द्वारा अध्यक्ष के आसन पर चढ़ने का कृत्य ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण’’ था। उन्होंने कहा कि कुछ यूडीएफ विधायकों ने सुरक्षाकर्मियों पर हमला किया था। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में बहस और चर्चाएं उचित हैं, न कि ‘‘अवरोध’’।
राज्य के संसदीय कार्य मंत्री एम बी राजेश ने दावा किया कि सतीशन और यूडीएफ इस सच्चाई से आंखें मूंद रहे हैं कि केरल उच्च न्यायालय ने चल रही एसआईटी जांच का समर्थन और प्रशंसा की है।
भाषा सुरभि अमित
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