केरल सरकार ने स्कूल में प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम में सावरकर से जुड़े सवाल की जांच के आदेश दिए

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केरल सरकार ने स्कूल में प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम में सावरकर से जुड़े सवाल की जांच के आदेश दिए

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  • Publish Date - August 8, 2026 / 08:52 PM IST,
    Updated On - August 8, 2026 / 08:52 PM IST

तिरुवनंतपुरम, आठ अगस्त (भाषा) केरल में स्कूल प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम के दौरान हिंदुत्व विचारक वीडी सावरकर को ‘‘ब्रिटिश हुकूमत से सर्वाधिक कठोर सजा पाने वाला’’ स्वतंत्रता सेनानी बताए जाने पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। राज्य के सामान्य शिक्षा मंत्री एन शमसुद्दीन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

मंत्री के कार्यालय की ओर से शनिवार को जारी बयान के मुताबिक, शमसुद्दीन ने सामान्य शिक्षा निदेशक को इस बात की जांच करने का निर्देश दिया है कि प्रश्नोत्तरी किसने तैयार की थी और इससे संबंधित कार्यक्रम किसने आयोजित किया था।

बयान के अनुसार, शमसुद्दीन ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया।

छह अगस्त को कासरगोड, कुंबला और मंजेश्वरम उप-जिलों के प्राथमिक विद्यालयों में छात्रों के लिए ‘फ्रीडम क्विज’ का आयोजन किया गया था।

बयान में कहा गया कि यह प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम न तो समाज विज्ञान क्लब और न ही सामान्य शिक्षा विभाग के गतिविधि कैलेंडर का हिस्सा था। इसमें कहा गया कि दोनों में से किसी ने भी किसी व्यक्ति को सवाल तैयार करने या स्वतंत्र रूप से प्रतियोगिता आयोजित करने के लिए अधिकृत भी नहीं किया था।

बयान में कहा गया, ‘‘जिस व्यक्ति ने ऐतिहासिक रूप से गलत सवाल शामिल किया, उसकी सोच पक्षपात वाली है।’’

इसमें कहा गया कि सामान्य शिक्षा मंत्री ने शिक्षा निदेशक को जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

संबंधित सवाल में पूछा गया था, ‘‘वह स्वतंत्रता सेनानी कौन हैं, जिन्हें अंग्रेजों ने सबसे कठोर सजा दी थी?’’ इसके जवाब के रूप में सावरकर का नाम दिया गया था।

खबरों के मुताबिक, यह प्रश्नावली सामाजिक विज्ञान क्लब से जुड़े शिक्षकों ने तैयार की थी।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और वामपंथी छात्र संगठनों ने इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार पर ‘‘संघ परिवार के एजेंडे के साथ खड़े होने’’ का आरोप लगाया।

माकपा के वरिष्ठ नेता और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने यूडीएफ सरकार पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के साथ ‘‘मिलीभगत’’ का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सावरकर के ‘‘असली इतिहास’’ को छिपाने और उनका महिमामंडन करने की कोशिशें की जा रही हैं।

विजयन ने कन्नूर में संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और आरएसएस ‘‘इतिहास को फिर से लिखने की कोशिश’’ कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को केरल में केंद्र की नयी शिक्षा नीति को लागू करने की कोशिशों के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए।

केरल के पूर्व सामान्य शिक्षा मंत्री वी शिवनकुट्टी ने आरोप लगाया कि प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम में शामिल संबंधित सवाल राज्य के सामान्य शिक्षा क्षेत्र का ‘‘भगवाकरण’’ करने और स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को विकृत करने की कोशिशों का हिस्सा है।

शिवनकुट्टी ने कहा कि सावरकर को एक ऐसे स्वतंत्रता सेनानी के तौर पर बताना आपत्तिजनक है, जिन्हें अंग्रेजों से सबसे कठोर सजा मिली थी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सवाल ‘‘झूठे इतिहास’’ का प्रचार-प्रसार करने की कोशिश के बराबर है।

उन्होंने मामले की विस्तृत जांच, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि विवादित सवाल के लिए सामान्य शिक्षा विभाग को छात्रों और जनता से माफी मांगनी चाहिए।

माकपा की छात्र इकाई ‘स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (एसएफआई) के प्रदेश सचिव पीएस संजीव ने आरोप लगाया कि इस प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम का मकसद सावरकर को स्वतंत्रता सेनानी के तौर पर दिखाना था। उन्होंने सावरकर को महात्मा गांधी की हत्या की साजिश में शामिल आरोपियों में से एक बताया।

संजीव ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘‘केरल में यूडीएफ सरकार के तहत सामान्य शिक्षा विभाग आईयूएमएल (इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग) के पास है। इस सरकार में स्वतंत्रता संग्राम में उस संघ परिवार की भूमिका गढ़ने की कोशिश की जा रही है, जिसने आजादी के आंदोलन के साथ विश्वासघात किया था।’’

मत्तन्नूर से विधायक और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) के प्रदेश सचिव के सानोज ने भी इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि स्कूलों में आयोजित प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम में एक ऐसा सवाल शामिल करने का कोई औचित्य नहीं था, जिसमें सावरकर का कथित तौर पर महिमामंडन किया गया हो।

आईयूएमएल के वरिष्ठ नेता और राज्य सरकार में मंत्री रह चुके एमके मुनीर ने कहा कि सावरकर को देशभक्त के तौर पर पेश करना आरएसएस तथा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एजेंडे का हिस्सा है।

मुनीर ने कहा कि अगर प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम में वाकई ऐसा कोई सवाल शामिल किया गया है, तो इसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों की पहचान की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस मामले को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।

भाषा पारुल नेत्रपाल

नेत्रपाल