PM Modi Talk To JD Vance : PM मोदी और JD वेंस की देर रात फोन पर अहम बातचीत! रणनीतिक साझेदारी पर हुई गहन चर्चा, जानें क्यों खास है कॉल

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बीच शनिवार देर रात फोन पर अहम बातचीत हुई। पीएम मोदी ने बताया कि दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका की व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को विभिन्न क्षेत्रों में और मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की। इस दौरान पीएम मोदी ने जेडी वेंस को उनके नवजात बेटे के जन्म पर भी बधाई दी।

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  • Publish Date - August 9, 2026 / 12:03 AM IST,
    Updated On - August 9, 2026 / 12:03 AM IST

PM Modi Talk To JD Vance

HIGHLIGHTS
  • जेडी वेंस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन किया।
  • दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा की।
  • पीएम मोदी ने जेडी वेंस और उनकी पत्नी को बेटे के जन्म पर बधाई दी।

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बीच शनिवार देर रात फोन पर अहम बातचीत हुई। पीएम मोदी ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस बात की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का फोन आया था, जिसके दौरान भारत-अमेरिका की व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों में और अधिक मजबूत करने के उपायों पर गहन चर्चा की गई। इसके अलावा, पीएम मोदी ने जेडी वेंस को उनके नवजात बेटे के जन्म पर और अमेरिका की ‘सेकंड लेडी’ को बधाई भी दी।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान हुई सार्वजनिक बात

दोनों शीर्ष नेताओं के बीच यह बातचीत रणनीतिक लिहाज से काफी अहम मानी जा रही है। गौरतलब है कि पीएम मोदी और जेडी वेंस के बीच इससे पहले मई 2025 में पाकिस्तान के खिलाफ चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान सार्वजनिक रूप से फोन पर बात हुई थी, जिसकी जानकारी प्रधानमंत्री ने बाद में संसद (लोकसभा) में दी थी। इस पृष्ठभूमि के बाद दोनों नेताओं का एक बार फिर संपर्क में आना द्विपक्षीय संबंधों की निरंतरता को दर्शाता है।

FCRA कानूनों में प्रस्तावित बदलावों पर चिंता जताई थी

यह उच्चस्तरीय बातचीत ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका के एक सांसद राइली मूर ने भारत में गैर-सरकारी संगठनों ट्रस्टों और धार्मिक संस्थानों को मिलने वाली विदेशी फंडिंग से जुड़े FCRA कानूनों में प्रस्तावित बदलावों पर चिंता जताई थी। अमेरिकी सांसद ने इसे भारत में धार्मिक चैरिटी पर असर डालने वाला कदम बताते हुए चेतावनी दी थी। हालांकि, भारत के विदेश मंत्रालय ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया था कि देश की विधायी प्रक्रियाएं भारत का पूरी तरह से आंतरिक मामला हैं और अमेरिका समेत कई अन्य देशों में भी विदेशी फंडिंग्स को नियंत्रित करने वाले अपने सख्त कानून मौजूद हैं।

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