कोच्चि, 13 जुलाई (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम के एक भाजपा पार्षद को सोमवार को यह कहते हुए जेल के अंदर ही पद की शपथ लेने की अनुमति दे दी कि प्रक्रियात्मक खामियों की वजह से जनादेश को नाकाम नहीं किया जा सकता।
न्यायमूर्ति पी.वी. कुन्हीकृष्णन ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम के वाझोट्टुकोनम वार्ड के भाजपा पार्षद सुगाथन आर. की याचिका पर यह आदेश दिया। यह भाजपा पार्षद केरल असामाजिक गतिविधि रोकथाम अधिनियम (केएएपीए) के तहत एहतियातन हिरासत में हैं।
पिछले महीने, उच्च न्यायालय ने नगर निगम के 20 भाजपा पार्षदों को यह कहते हुए दोबारा शपथ लेने का निर्देश दिया था कि पहले ली गई शपथ कानून में तय प्रारूप के मुताबिक नहीं थी।
इसके बाद, सुगाथन दो आपराधिक मामलों में फंस गए। उन्हें नेडुमंगड की न्यायिक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट (अदालत द्वितीय) से अंतरिम जमानत मिली, ताकि वह नई शपथ ले सकें। यह शपथ 14 जुलाई को निगम कार्यालय में दिलाई जानी है।
हालांकि, उन्हें केएएपीए के तहत हिरासत में ले लिया गया, ऐसे में उनका कार्यक्रम में शामिल होना मुश्किल हो गया था।
सुनवाई के दौरान अभियोजन महानिदेशक (डीजीपी) ने कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता को एहतियाती हिरासत में रखा गया था, इसलिए उन्हें जेल से रिहा नहीं किया जा सकता था।
हालांकि, डीजीपी ने कहा कि अगर अदालत का ऐसा निर्देश हो, तो राज्य सरकार याचिकाकर्ता के लिए जेल के अंदर ही शपथ लेने की जरूरी व्यवस्था करने को तैयार है।
अदालत ने कहा कि जब यह मामला पहले उसके सामने आया था, तो उसने डीजीपी को निर्देश दिया था कि वह इस बात की जांच करें कि क्या जेल के अंदर शपथ ग्रहण समारोह आयोजित करने की व्यवस्था की जा सकती है, क्योंकि उसे सूचित किया गया था कि याचिकाकर्ता के शपथ न लेने से नगर निगम में वर्तमान सत्तारूढ़ दल के बहुमत पर असर पड़ सकता है।
अदालत ने कहा कि उसका न तो लोकतंत्र का संहार करने का इरादा था और न ही ऐसा करना उसका उद्देश्य है, बल्कि, उसके निर्देश कानून के शासन को संरक्षित और मजबूत करने के संवैधानिक दायित्व के अनुरूप जारी किए जाते हैं।
उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि तिरुवनंतपुरम के महापौर और निगम के जरूरी कम-से-कम अधिकारियों को प्रक्रिया पूरी करने के लिए जेल में प्रवेश करने की अनुमति दी जाए।
भाषा
राजकुमार सुरेश
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