कोच्चि, पांच मार्च (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2-गोज बियॉन्ड’ का नाम बदलने के अनुरोध वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।
अदालत ने फिल्म की रिलीज का मार्ग प्रशस्त करने वाली खंडपीठ पर आक्षेप लगाने के लिए याचिकाकर्ताओं को फटकार लगाई।
मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी एम की पीठ ने सेवानिवृत्त शिक्षक एवं सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रमोहनन के सी एवं वकील मेहनाज पी मोहम्मद द्वारा दायर जनहित याचिका में की गई कुछ टिप्पणियों की कड़ी आलोचना की।
जब इस मामले पर सुनवाई शुरू हुई तो पीठ ने कहा कि फिल्म से संबंधित याचिकाएं एकल न्यायाधीश की पीठ और खंडपीठ के समक्ष लंबित हैं इसलिए जनहित याचिका पर सुनवाई करना उसके लिए उचित नहीं होगा।
मुख्य न्यायाधीश सेन ने कहा कि बेहतर होगा कि फिल्म के निर्माताओं की अपील पर सुनवाई कर रही खंडपीठ इस मामले की सुनवाई करे।
हालांकि, जब मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने अधिवक्ता चेल्सन चेम्बराथी के माध्यम से दायर जनहित याचिका में कुछ टिप्पणियों पर गौर किया तो पीठ ने उस पर असंतोष जाहिर किया और सवाल किया कि याचिका में ऐसी टिप्पणियां कैसे शामिल की गईं।
पीठ ने याचिकाकर्ताओं और उनके वकील की इस तरह की जनहित याचिका दायर करने के लिए आलोचना की जिसके बाद वकील चेम्बराथी ने अदालत से कई बार बिना शर्त माफी मांगी।
इसके बाद पीठ ने जनहित याचिका का निपटारा कर दिया और याचिकाकर्ताओं को खंडपीठ पर आक्षेप लगाने वाले हिस्सों को हटाकर एक नयी याचिका दायर करने की अनुमति दी जिससे फिल्म की रिलीज का मार्ग प्रशस्त हुआ।
न्यायमूर्ति सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और पी वी बालकृष्णन की पीठ ने 27 फरवरी को उसी दिन के एकल न्यायाधीश के उस आदेश पर रोक लगाकर फिल्म की रिलीज का रास्ता साफ कर दिया था, जिसमें फिल्म की स्क्रीनिंग को 15 दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया था।
खंडपीठ का अंतरिम आदेश फिल्म के निर्माता विपुल अमृतलाल शाह द्वारा दायर अपील पर आया था।
भाषा सुरभि संतोष
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