नयी दिल्ली, पांच मार्च (भाषा) ग्रामीण और कस्बाई इलाकों की महिलाएं रोजमर्रा के लेनदेन के लिए डिजिटल भुगतान का तेजी से इस्तेमाल करने लगी हैं और अब करीब 38 प्रतिशत महिलाएं सप्ताह में कम-से-कम एक बार यूपीआई का इस्तेमाल कर रही हैं। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
डिजिटल और वित्तीय सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनी ‘पेनियरबाई’ की रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाएं दैनिक जरूरत वाले सामान की खरीद, बिजली-पानी बिलों के भुगतान और मोबाइल रिचार्ज जैसे खर्चों के लिए एकीकृत भुगतान प्रणाली यूपीआई का इस्तेमाल कर रही हैं।
यह सर्वेक्षण रिपोर्ट देश के ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में डिजिटल एवं वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराने वाली 10,000 महिला एजेंट पर आधारित है। इससे पता चलता है कि 85 प्रतिशत महिलाएं अपने परिवार की मुख्य बचतकर्ता हैं, जो वित्तीय अनुशासन में बढ़ोतरी को दर्शाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 44 प्रतिशत महिलाएं छोटे-छोटे निवेश (एसआईपी) के जरिये सोने से जुड़े बचत उत्पादों में निवेश करने की इच्छुक हैं। हालांकि, इसके लिए उनके स्थानीय सेवा केंद्रों पर मार्गदर्शन उपलब्ध होना जरूरी है।
इसके अलावा 98 प्रतिशत महिलाएं छोटी राशि वाले जमा उत्पादों, जैसे सावधि जमा (एफडी) या आवर्ती जमा (आरडी) के जरिये बचत करने को तैयार हैं। इन निवेश उत्पादों में आसान निकासी की सुविधा होने पर महिलाएं इसे आसानी से अपनाने को तैयार हैं।
हालांकि, म्यूचुअल फंड योजनाओं को लेकर जागरूकता अभी भी सीमित है और 10 प्रतिशत से भी कम महिलाएं इसके बारे में जानती हैं।
पेनियरबाई के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) आनंद कुमार बजाज ने कहा, ‘‘अब अधिक महिलाएं स्वतंत्र रूप से अपने बैंक खाते संचालित कर रही हैं, नियमित बचत कर रही हैं और सोना-आधारित बचत, बीमा तथा औपचारिक ऋण जैसे वित्तीय साधनों के प्रति सहज हो रही हैं।’’
रिपोर्ट कहती है कि नकदी की निकासी अब भी महिलाओं के लिए सबसे अहम सेवा बनी हुई है।
करीब 54 प्रतिशत महिलाएं अंगुलियों के निशान या चेहरे की पहचान जैसे बायोमेट्रिक सत्यापन के जरिये पैसे निकालना पसंद करती हैं। आमतौर पर एक बार में 1,000 से लेकर 2,500 रुपये की निकासी सबसे अधिक देखी गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 26 प्रतिशत महिलाओं ने बीमा लिया हुआ है, जिसमें स्वास्थ्य, जीवन और दुर्घटना बीमा सबसे लोकप्रिय श्रेणियां हैं।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
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