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जबलपुर: मध्य प्रदेश के आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अब अपनी सेवा को सरकारी दर्जा और समान वेतन देने की मांग को लेकर हाईकोर्ट का रुख किया है। मप्र आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संघ ने कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें यह चुनौती दी गई है कि पूरी जिम्मेदारी और काम करने के बावजूद आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारियों के समान दर्जा और लाभ नहीं दिए जा रहे हैं। Anganwadi Karmchari News मामले में दायर याचिका में यह भी कहा गया है कि समान काम के लिए समान वेतन का संवैधानिक सिद्धांत लागू नहीं किया जा रहा, जो कि मूल अधिकारों और न्यायसंगत दृष्टिकोण के खिलाफ है।
Anganwadi Karmchari News हाईकोर्ट ने इस याचिका को गंभीरता से लिया और राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। इसके साथ ही महिला एवं बाल विकास विभाग के मुख्य सचिव को भी नोटिस भेजा गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को यह बताना होगा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सरकारी दर्जा क्यों नहीं दिया गया और समान वेतन का संवैधानिक अधिकार क्यों लागू नहीं किया गया।
Anganwadi Karmchari News मामले में दायर याचिका में यह उल्लेख किया गया है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सामाजिक और शैक्षिक विकास के क्षेत्र में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। वे बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी जिम्मेदारियों को अपने कंधों पर संभालती हैं। इसके बावजूद उन्हें वेतन और सुविधा के मामले में सरकारी कर्मचारियों के बराबर दर्जा नहीं मिला है। संघ का कहना है कि यह स्थिति न केवल उनकी आर्थिक सुरक्षा को प्रभावित कर रही है, बल्कि उनके आत्मसम्मान और सामाजिक पहचान को भी चुनौती देती है।
हाईकोर्ट ने Anganwadi Karmchari News मामले में अगली सुनवाई 17 फरवरी को तय की है। इस दौरान अदालत को उम्मीद है कि राज्य सरकार और महिला एवं बाल विकास विभाग अपनी स्थिति स्पष्ट रूप से पेश करेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कोर्ट आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के पक्ष में फैसला करता है, तो इससे राज्य में लाखों कार्यकर्ताओं के वेतन और सुविधाओं में सुधार हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में समान काम के लिए समान वेतन और सरकारी दर्जा देने के कई मामलों में न्यायिक निर्णय मिल चुके हैं। ऐसे में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की यह याचिका पिछले फैसलों के आधार पर मजबूत मानी जा रही है।