CG Dhan Kharidi Last Date 2025-26: कांकेर में दो दिन पहले ही बंद हो जाएगी धान खरीदी, 29 जनवरी लास्ट डेट, जानिए क्यों लिया गया ऐसा फैसला

CG Dhan Kharidi Last Date 2025-26: कांकेर में दो दिन पहले ही बंद हो जाएगी धान खरीदी, 29 जनवरी लास्ट डेट, जानिए क्यों लिया गया ऐसा फैसला

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  • Publish Date - January 20, 2026 / 02:23 PM IST,
    Updated On - January 20, 2026 / 03:38 PM IST

CG Dhan Kharidi Last Date 2025-26: कांकेर में दो दिन पहले ही बंद हो जाएगी धान खरीदी, 29 जनवरी लास्ट डेट / Image: IBC24 Customized

HIGHLIGHTS
  • 30 और 31 जनवरी 2026 को धान की खरीदी नहीं होगी
  • धान अब 29 जनवरी 2026 को खरीदा जाएगा
  • किसानों को हो सकती है समस्या

कांकेर: CG Dhan Kharidi Last Date 2025-26 छत्तीसगढ़ में धान खरीदी अपने अंतिम दौर में है, आज से महज 10 दिन बाद धान खरीदी का अंतिम दिन है। यानि सरकार की तय समय सीमा के अनुसार 31 जनवरी 2026 के बाद धान खरीदी बंद कर दी जाएगी। किसानों को 31 जनवरी तक का टोकन जारी कर दिया गया है। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी ऑफलाइन टोकन और लिमिट बढ़ाने की मांग की जा रही है। लेकिन इस बीच कांकेर जिला प्रशासन ने ऐसा आदेश जारी किया है, जो किसानों की टेंशन बढ़ा सकता है।

30 और 31 जनवरी को नहीं होगी धान खरीदी

CG Dhan Kharidi Last Date 2025-26 दरअसल कांकेर जिला प्रशासन ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की अंतिम तिथि 31 जनवरी 2026 निर्धारित किया गया है, लेकिन 30 एवं 31 जनवरी को शनिवार और रविवार होने के कारण उक्त तिथि में धान बेचने के लिए जारी किए गए टोकन को शासन स्तर से संशोधित किया जाकर 29 जनवरी को शिफ्ट कर दिया गया है। अतः 30 एवं 31 जनवरी के लिए जारी टोकन का धान अब 29 जनवरी को खरीदा जाएगा। जिला खाद्य अधिकारी ने जिले के किसानों से अपील करते हुए कहा है कि 30 एवं 31 जनवरी को धान विक्रय के लिए जारी टोकन वाले समस्त किसान धान बेचने के लिए 29 जनवरी को अपने क्षेत्र के खरीदी केन्द्रों में ले जाना सुनिश्चित करें।

धान खरीदी में 10 दिन शेष

दूसरी ओर धान खरीदी के सिर्फ 10 दिन शेष है और अब तक 95 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा की खरीदी हो चुकी है। लेकिन लाखों किसानों का धान अब तक नहीं बिका है। सरकार ने 165 लाख मीट्रिक टन खरीदी का लक्ष्य रखा है। सरकार के तय लक्ष्य को देखते हुए ये भी कहा जा रहा है कि धान खरीदी की समय सीमा को आगे बढ़ाया जा सकता है।

धान बेचकर खुश हैं किसान

वहीं, धमतरी जिले के ग्राम परखंदा के प्रगतिशील किसान साहिल साहू ने यह साबित कर दिया है कि यदि खेती को सही योजना, आधुनिक तकनीक और सरकारी व्यवस्थाओं के सहयोग से किया जाए, तो यह लाभ का सशक्त माध्यम बन सकती है। साहिल साहू ने इस खरीफ सीजन में अपने 11 एकड़ खेत में उत्पादित धान को गाड़ाडीह उपार्जन केंद्र में समर्थन मूल्य पर बेचते हुए कुल 231 क्विंटल धान का सफलतापूर्वक उपार्जन किया।

बाजार में उचित मूल्य प्राप्त हो रहा: किसान

कई वर्षों से समर्थन मूल्य पर धान विक्रय कर रहे साहिल साहू बताते हैं कि इस वर्ष की धान खरीदी व्यवस्था पहले की तुलना में कहीं अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और किसान-हितैषी रही। उपार्जन केंद्र में समयबद्ध तौल, व्यवस्थित लाइन प्रणाली, सहयोगी कर्मचारियों की मौजूदगी और त्वरित प्रक्रिया के चलते किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा। इससे किसानों का समय बचा और व्यवस्था के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ। अपनी सफलता के पीछे के अनुभव साझा करते हुए साहिल साहू कहते हैं कि उन्नत किस्म के बीजों का चयन, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और कृषि कार्यों का समय पर निष्पादन उनकी खेती की प्रमुख विशेषता है। कृषि विभाग से प्राप्त मार्गदर्शन और आधुनिक तकनीकों को अपनाने से न केवल उत्पादन में वृद्धि हुई है, बल्कि फसल की गुणवत्ता भी बेहतर हुई है, जिससे बाजार में उचित मूल्य प्राप्त हो रहा है।

किसान को आत्मनिर्भर बनाती है आर्थिक स्थिरता

धान विक्रय से मिली आय का उपयोग साहिल साहू बेहतर खेती के विस्तार, पुराने कृषि ऋणों के भुगतान और परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में कर रहे हैं। उनका मानना है कि आर्थिक स्थिरता किसान को आत्मनिर्भर बनाती है और परिवार को सुरक्षित भविष्य देने में सहायक होती है। परखंदा के साहिल साहू की यह सफलता कहानी क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा है, जो यह संदेश देती है कि सही रणनीति, सतत परिश्रम और सरकारी योजनाओं के प्रभावी उपयोग से खेती को समृद्धि की राह पर आगे बढ़ाया जा सकता है।

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क्या छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की तारीख आगे बढ़ेगी?

फिलहाल सरकार ने ऐसी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, अंतिम तिथि 31 जनवरी 2026 ही है। हालांकि, कम खरीदी को देखते हुए कयास लगाए जा रहे हैं।

अगर मेरा टोकन 30 जनवरी का है, तो मुझे क्या करना होगा?

अगर आप कांकेर जिले से हैं, तो आपको अपना धान 29 जनवरी को मंडी लेकर जाना होगा। अन्य जिलों के किसान अपने स्थानीय उपार्जन केंद्र से संपर्क करें।

क्या ऑफलाइन टोकन अभी भी मिल रहे हैं?

ग्रामीण क्षेत्रों में ऑफलाइन टोकन की मांग जारी है, लेकिन वर्तमान में अधिकांश प्रक्रिया ऑनलाइन और पहले से जारी टोकन के आधार पर ही चल रही है।

धान बेचने के कितने दिन बाद पैसा खाते में आता है?

आमतौर पर धान बेचने के 48 से 72 घंटों के भीतर राशि किसान के पंजीकृत बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है।