तिरुवनंतपुरम, 19 जून (भाषा) संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के नेताओं ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन द्वारा पेश किए गए राज्य बजट का स्वागत करते हुए इसे नवाचार, बुनियादी ढांचे, लंबे समय के आर्थिक बदलाव पर जोर देने वाला और विकास पर केंद्रित दस्तावेज बताया।
सतीशन के पास वित्त विभाग का भी जिम्मा है।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यह बजट तत्काल चुनौतियों से आगे बढ़कर सोचने की कोशिश करता है और वित्तीय सीमाओं के बावजूद केरल को भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में कदम उठाता है।
उन्होंने विशेष रूप से निवेश, नवाचार, लॉजिस्टिक्स, तकनीक और रोजगार सृजन पर दिए गए जोर का स्वागत किया।
थरूर ने साथ ही ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था, अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था और विमानन क्षेत्र पर भी ध्यान दिये जाने की भी सराहना की।
उन्होंने मिशन समुद्र को बजट में शामिल सबसे महत्वाकांक्षी प्रस्तावों में से एक बताया।
परिवहन मंत्री सी.पी. जॉन ने बजट में तटीय क्षेत्रों के कल्याण, मत्स्य पालन और परिवहन ढांचे पर दिए गए जोर का स्वागत किया।
उन्होंने मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए किए गए प्रावधानों, ‘पून्थुरा फिशिंग हार्बर’ व पून्थुरा-इडयार पुल से जुड़े प्रस्तावों, सरकारी बसों व पर्यटक परमिट वाले वाहनों के लिए कर छूट तथा जल परिवहन और मिशन समुद्र जैसी योजनाओं का प्रमुखता से उल्लेख किया।
श्रम मंत्री बिंदु कृष्णा ने ‘फेसबुक’ पोस्ट में कहा कि बजट में कोल्लम के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं, जिनमें चिनक्कडा में प्रस्तावित स्काईवे व अर्बन पार्क, अष्टमुडी पर्यटन का विकास, कोल्लम बंदरगाह का विस्तार और क्षतिग्रस्त सड़कों का पुनर्निर्माण शामिल हैं।
उन्होंने श्रम विभाग के लिए 650.46 करोड़ रुपये, महिला एवं बाल विकास योजनाओं के लिए 590.11 करोड़ रुपये, पशुपालन के लिए 258.8 करोड़ रुपये और डेयरी विकास के लिए 102.88 करोड़ रुपये के प्रावधान का उल्लेख किया।
उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम. जॉन ने कहा कि बजट में ऐसे बदलावकारी कदमों की परिकल्पना की गई है, जिनका उद्देश्य केरल को “विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त उच्च शिक्षा केंद्र” बनाना है।
उन्होंने केरल नॉलेज वैली, केरल रिसर्च पार्क, वायनाड में जनजातीय विश्वविद्यालय, सिद्धार्थन स्टूडेंट्स डिस्ट्रेस ऐप और ‘ग्लोबल एम्प्लॉयमेंट ऑब्जर्वेटरी’ जैसे प्रस्तावों का स्वागत किया।
रोजी ने कहा कि ये योजनाएं केरल के उच्च शिक्षा क्षेत्र को आधुनिक बनाएंगी और संस्थानों को “अंतरराष्ट्रीय मानकों” तक पहुंचने में मदद करेंगी।
भाषा जितेंद्र माधव
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