केरल वक्फ बोर्ड संयुक्त सचिव की निगरानी में काम नहीं करेगा : उच्चतम न्यायालय

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केरल वक्फ बोर्ड संयुक्त सचिव की निगरानी में काम नहीं करेगा : उच्चतम न्यायालय

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  • Publish Date - July 21, 2026 / 05:39 PM IST,
    Updated On - July 21, 2026 / 05:39 PM IST

नयी दिल्ली, 21 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को केरल उच्च न्यायालय के एक अंतरिम आदेश के उस हिस्से को हटाने का निर्देश दिया, जिसमें राज्य वक्फ बोर्ड को एक संयुक्त सचिव की निगरानी में काम करने के लिए कहा गया था।

वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता बहाल करते हुए, प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश में बदलाव किया और उक्त आदेश के खिलाफ दायर अपीलों का निस्तारण कर दिया।

पीठ ने कहा, ‘‘उच्च न्यायालय के आदेश के पैराग्राफ 6 की शुरुआती पंक्ति को मद्देनजर रखते हुए, जिसके तहत बोर्ड को अदालत की अनुमति के बिना किसी भी पूंजीगत व्यय आदि को करने से रोका गया है, हम इस बात से सहमत हैं कि आदेश के पैराग्राफ 6 की अंतिम पंक्ति को बनाए रखने की कोई आवश्यकता नहीं है।’’

शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा, ‘‘अत: यह निर्देश कि बोर्ड सरकार के एक संयुक्त सचिव की निगरानी में काम करेगा, अब निरस्त किया जाता है। संयुक्त सचिव, जो बोर्ड के सदस्य हैं, उसी हैसियत से अपना कार्य जारी रखेंगे। मामला कल उच्च न्यायालय के समक्ष रखा जाएगा। हम उच्च न्यायालय से अनुरोध करते हैं कि वह सभी पक्षों को अपने दावे/जवाबी दावे दाखिल करने का उचित अवसर देने के बाद मामले का शीघ्र निस्तारण करे।’’

पंद्रह जुलाई को अपने अंतरिम आदेश में केरल उच्च न्यायालय ने राज्य वक्फ बोर्ड को उसकी अनुमति के बिना कोई भी बड़ा निर्णय लेने से रोक दिया था।

मामले से जुड़े एक वरिष्ठ वकील ने बताया कि अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि बोर्ड अदालत की स्पष्ट अनुमति के बिना कोई भी पूंजीगत व्यय न करे और न ही कोई नीतिगत निर्णय ले।

उच्च न्यायालय ने यह अंतरिम निर्देश उन जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान दिए थे, जिनमें आरोप लगाया गया था कि बोर्ड एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तीकरण, दक्षता और विकास अधिनियम के तहत निर्धारित प्रावधानों के अनुसार काम नहीं कर रहा है, क्योंकि इसमें दो गैर-मुस्लिम सदस्य शामिल नहीं हैं।

वक्फ बोर्ड की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता हुजैफा अहमदी ने उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि इस तरह का ‘‘असाधारण आदेश’’ पारित करने से पहले बोर्ड के सदस्यों को याचिकाओं की प्रतियां तक उपलब्ध नहीं कराई गई थीं।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बागची ने सवाल किया कि बोर्ड के सदस्यों की संरचना से जुड़े मुद्दे को लेकर उसके कामकाज को रोकने की क्या आवश्यकता थी। उन्होंने कहा, ‘‘सिर्फ इस पहलू के कारण बोर्ड का कामकाज क्यों रोका जाए? उच्च न्यायालय के आदेश के पैराग्राफ 6 पर रोक लगाया जाता है।’’

केरल सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता ने पीठ को बताया कि यह मामला पहले से ही सुनवाई के लिए उच्च न्यायालय के समक्ष सूचीबद्ध है।

अहमदी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार बोर्ड को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं का समर्थन कर रही है। उन्होंने कहा, ‘‘आप याचिकाकर्ता का समर्थन क्यों कर रहे हैं?

पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश के पैराग्राफ 6 के उस हिस्से को बनाए रखने का कोई औचित्य नहीं है, जिसमें वक्फ मामलों को देखने वाले राज्य सरकार के संयुक्त सचिव की निगरानी में वक्फ बोर्ड को काम करने का निर्देश दिया गया था।

हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि संयुक्त सचिव बोर्ड के सदस्य के रूप में अपना काम जारी रख सकते हैं, लेकिन वे किसी भी पर्यवेक्षी भूमिका में कार्य नहीं करेंगे।

भाषा सुभाष दिलीप

दिलीप