हर 6 महीने में किडनी की जांच कराना अनिवार्य किया जाए : संसदीय समिति
हर 6 महीने में किडनी की जांच कराना अनिवार्य किया जाए : संसदीय समिति
नयी दिल्ली, 11 अगस्त (भाषा) संसद की एक समिति ने किडनी खराब हो जाने पर इलाज के बजाय बीमारी की रोकथाम की नीति अपनाते हुए 20 साल और उससे अधिक उम्र के सभी लोगों के लिए हर छह महीने में किडनी की जांच और ज्यादा जोखिम वाले सभी लोगों की सालाना जांच अनिवार्य करने की सिफारिश की है।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने सिफारिश की है कि ‘गैर-संचारी रोगों की रोकथाम और नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम’ के तहत, गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) के लोगों को साल में दो बार किडनी की जांच (केएफटी) मुफ्त में और गरीबी रेखा से ऊपर (एपीएल) के लोगों को बहुत कम दर पर यह सुविधा उपलब्ध करायी जाए।
समिति ने कहा कि अधिक जोखिम वाले लोगों की जांच में ‘एस्टिमेटेड ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन रेट’ और ‘यूरिन एल्ब्यूमिन/प्रोटीन टेस्ट’ के जरिए किडनी के कामकाज की जांच शामिल होनी चाहिए। इसके साथ ही सही ‘रेफरल’ और ‘फॉलो-अप’ भी होना चाहिए।
राज्यसभा सदस्य राम गोपाल यादव की अध्यक्षता वाली समिति ने ‘‘भारत में किडनी के गंभीर रोग की व्यापकता – रोकथाम, पहचान, उपचार और प्रबंधन’’ पर अपनी 177वीं रिपोर्ट में रोग की रोकथाम, शुरुआती पहचान, उपचार से जुड़ी 66 सिफारिशें कीं।
यह रिपोर्ट 7 अगस्त को राज्यसभा और लोकसभा में पेश की गई।
आयोग ने कहा कि अधिक जोखिम वाले जिन समूह की समय-समय पर जांच जरूरी है, उनमें मधुमेह और उच्च रक्तचाप वाले लोग शामिल हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि हर साल किडनी की बीमारी के आखिरी चरण वाले लगभग 2.2 लाख नए मरीज जुड़ते हैं, जिससे सालाना लगभग 3.4 करोड़ डायलिसिस सत्र की अतिरिक्त मांग पैदा होती है।
समिति ने जिला अस्पतालों में नेफ्रोलॉजी सेवाओं को मजबूत करने, ‘स्पेशलिस्ट रेफरल सिस्टम’ को बेहतर बनाने और बच्चों की किडनी की देखभाल के लिए एक अलग राष्ट्रीय कार्यक्रम शुरू करने की भी सिफारिश की।
भाषा सुभाष अविनाश
अविनाश

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