कोलकाता में फरार तृणमूल पार्षद के खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज

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कोलकाता में फरार तृणमूल पार्षद के खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज

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  • Publish Date - June 12, 2026 / 12:21 PM IST,
    Updated On - June 12, 2026 / 12:21 PM IST

कोलकाता, 12 जून (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के पार्षद सुशांत घोष और चार अन्य लोगों के खिलाफ यहां फुटपाथ पर एक स्टॉल (दुकान) 3.5 लाख रुपये में बेचने के मामले में जालसाजी और धोखाधड़ी के आरोपों में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह प्राथमिकी दक्षिण कोलकाता के कस्बा इलाके के एक निवासी द्वारा आनंदपुर थाने में दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है।

प्राथमिकी के अनुसार, शिकायतकर्ता नवंबर 2022 में अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए एक दुकान की तलाश कर रहा था। इसी दौरान घोष और उनके सहयोगियों ने आनंदपुर रोड पर रूबी क्रॉसिंग के पास फुटपाथ पर सात फुट का एक स्टॉल दिलाने का कथित तौर पर वादा किया।

अधिकारी ने बताया कि आरोपियों ने शिकायतकर्ता को कथित रूप से एक ‘‘फर्जी’’ नगर निगम लाइसेंस उपलब्ध कराया और प्रस्तावित दुकान के बदले उससे 3.5 लाख रुपये ले लिए।

प्राथमिकी में कहा गया है कि पैसा लेने के बाद आरोपियों ने अपना रुख बदल लिया। वादा की गई सात फुट की दुकान देने के बजाय उन्होंने शिकायतकर्ता को चार फुट का एक छोटा-सा स्टॉल स्वीकार करने के लिए मजबूर किया।

शिकायतकर्ता ने यह भी कहा है कि उस स्टॉल का उपयोग रूबी मार्केट कमेटी द्वारा एम्बुलेंस कक्ष के रूप में किया जा रहा था और उसके पास कोई वैध सरकारी लाइसेंस नहीं था।

पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘‘हमें लिखित शिकायत प्राप्त हुई है और प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। आरोपों की जांच की जा रही है और मामले के सभी पहलुओं की कानून के अनुसार पड़ताल की जाएगी।’’

उन्होंने कहा कि आरोपों में धोखाधड़ी, आपराधिक धमकी और जालसाजी शामिल हैं।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि वह पार्षद और उसके सहयोगियों के डर से वर्षों तक चुप रहा।

घोष आनंदपुर थाने में उनके खिलाफ दर्ज एक अन्य मामले में भी फरार बताए जा रहे हैं।

ईएम बाइपास-रूबी क्रॉसिंग के पास काम करने वाले एक फेरीवाला संघ के सदस्यों ने 29 मई को पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि पार्षद फुटपाथ पर दुकान लगाने की अनुमति देने के बदले तीन से चार लाख रुपये तक की अवैध वसूली कर रहे थे।

शिकायतकर्ताओं का दावा था कि इस तरीके से फेरीवालों से लगभग तीन करोड़ रुपये वसूले गए और उन्होंने मामले में पुलिस हस्तक्षेप की मांग की थी।

भाषा गोला मनीषा

मनीषा