कुणाल बस ये चाहता था कि उसके पिता घर लौट आयें: मौसी
कुणाल बस ये चाहता था कि उसके पिता घर लौट आयें: मौसी
छत्रपति संभाजीनगर, 25 अगस्त (भाषा) पिछले सप्ताह छत्रपति संभाजीनगर में पहाड़ी की चोटी से कूदकर अपनी जान देने वाले कुणाल चंदगुडे की मौसी ने सोमवार को दावा किया कि उसका आत्महत्या करने का इरादा नहीं था; वह तो बस अपने पिता को भावुक करके उन्हें घर लौटने के लिए मनाना चाहता था।
कुणाल की मौसी ने इस घटना का मोबाइल फोन से संबंध की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि किशोर अपने माता-पिता के बीच चल रहे तनाव और गलतफहमियों से परेशान था।
उन्होंने कहा कि किशोरवय होने के कारण शायद वह स्थिति की जटिलताओं को पूरी तरह समझ नहीं पाया।
पुलिस के अनुसार, 21 अगस्त को तिसगांव इलाके में यह दुखद घटना हुई, जब घरेलू झगड़े के बाद पहाड़ की चोटी से गिरने से चंदगुडे परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई।
मृतकों की पहचान शहर के ज़ल्टा फाटा इलाके के मुरलीधर चंदगुडे (48), उनकी पत्नी संगीता और उनके 19 साल के बेटे कुणाल के तौर पर हुई है।
संगीता की बहन कल्याणी दाभाडे ने कहा कि किशोर अपने माता-पिता के बीच तनाव से बुरी तरह परेशान था और वह चाहता था कि उसके पिता घर लौट आयें।
कल्याणी ने कहा, ‘‘ मेरे जीजाजी (मुरलीधर) चालक थे और हम यह मानते हैं। लेकिन वह गरीब परिवार से नहीं थे। उनके पास खेत था और वह पैसे कमाते थे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘बात फोन की नहीं थी। कुणाल चाहता था कि उसके पिता घर लौट आएं। अगर उसे फोन चाहिए होता, तो वह 20,000-25,000 रुपये में पुराना फोन खरीद सकता था। यह कोई इतने अधिक पैसे की बात भी नहीं थी।’’
कल्याणी ने बताया कि कुणाल के पास पढ़ाई के लिए एक फ़ोन था और उसकी मां के पास भी एक फ़ोन था।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि कुणाल आत्महत्या करना चाहता था। वह तो बस अपने पिता को भावुक करके उन्हें घर लौटने के लिए मनाना चाहता था।’’
उनके अनुसार, कुणाल अपने माता-पिता के बीच लगातार चल रहे तनाव और गलतफहमियों से परेशान था।
कल्याणी ने कहा, ‘‘घटना से पांच-छह दिन पहले कुणाल और उसके पिता के बीच बातचीत हुई थी। उसने अपने पिता से घर वापस आने को कहा था। लेकिन उसके पिता ने अपने माता-पिता और बहनों के बारे में बात की। कुणाल छोटा था और शायद यह सब समझ नहीं पा रहा था। गलतफहमियां बढ़ती गईं और वह परेशान था।’’
उन्होंने कहा कि उन्होंने कुणाल को समझाने की कोशिश की थी कि परिवार में मतभेद होना जिंदगी का हिस्सा है, लेकिन कुणाल अपने पिता को वापस लाने की ज़िद पर अड़ा रहा।
उन्होंने कहा,‘‘उसने मुझे कभी नहीं बताया कि उसके दिमाग में ऐसा कुछ चल रहा था। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि वह ऐसा कुछ करेगा। मुझे लगता है कि यह अचानक हुई घटना है क्योंकि उसके माता-पिता उससे बहुत प्यार करते थे और कोई आर्थिक तंगी भी नहीं थी। कुणाल के पिता उससे बहुत प्यार करते थे, भले ही वह उसके साथ नहीं रह रहे थे।’’
भाषा राजकुमार नरेश
नरेश

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