बेंगलुरु, पांच फरवरी (भाषा) कर्नाटक के मंत्री एम.बी. पाटिल ने बृहस्पतिवार को कहा कि कांग्रेस के लिंगायत विधायकों की हालिया बैठक शक्ति प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि यह समुदाय के कल्याण के लिए थी।
पाटिल ने कहा कि आलंद के विधायक बी आर पाटिल ने यह प्रस्ताव रखा था, जिसका रामदुर्ग के विधायक अशोक पट्टन ने समर्थन किया और फिर उन दोनों ने कुछ दिन पहले लिंगायत विधायकों की एक बैठक बुलाई थी।
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों पर कोई चर्चा नहीं हुई जिनसे भ्रम की स्थिति पैदा होती है, जैसे कि मंत्री कौन बने और मुख्यमंत्री कौन बने।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री एम बी पाटिल ने यहां पत्रकारों से कहा, “चार दिन पहले कांग्रेस के लिंगायत विधायकों की एक बैठक हुई थी। यह शक्ति प्रदर्शन नहीं था। अशोक पाटिल और बी आर पाटिल ने बैठक बुलाई थी और इसमें केवल सामुदायिक कल्याण पर चर्चा हुई।”
उन्होंने कहा कि इस तरह की बैठकें नियमित होती हैं और विभिन्न समुदायों के विधायकों द्वारा आयोजित की जाती हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन हमारी बैठक को लिंगायत शक्ति प्रदर्शन के रूप में पेश करना सही नहीं है।”
एम बी पाटिल ने कहा, “संख्या की दृष्टि से हमारा सबसे बड़ा समुदाय है। हमारी जीत की दर सबसे अधिक है।”
लिंगायत समुदाय के राजनीतिक योगदान पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, “1989 में लिंगायत समुदाय के समर्थन से कांग्रेस ने 178 सीट जीतकर इतिहास रचा था। हमारी पार्टी (कांग्रेस) ने 2023 के विधानसभा चुनाव में 56 लिंगायत नेताओं को टिकट दिया था, जिनमें से 36 विजयी हुए थे।”
उन्होंने कहा, “सरकार में पर्याप्त प्रतिनिधित्व की मांग करना गलत नहीं है, लेकिन हम किसी दूसरे समुदाय का हिस्सा नहीं छीनेंगे।”
कर्नाटक में लिंगायत एक प्रभावशाली समुदाय है, जो मुख्य रूप से राज्य के उत्तरी भाग में केंद्रित है।
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