शराब नीति प्रकरण: उच्च न्यायालय ने ईडी की याचिका पर केजरीवाल एवं अन्य से दो अप्रैल तक मांगा जवाब

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शराब नीति प्रकरण: उच्च न्यायालय ने ईडी की याचिका पर केजरीवाल एवं अन्य से दो अप्रैल तक मांगा जवाब

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  • Publish Date - March 19, 2026 / 05:42 PM IST,
    Updated On - March 19, 2026 / 05:42 PM IST

नयी दिल्ली, 19 मार्च (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और 21 अन्य लोगों को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की उस याचिका पर जवाब देने के लिए दो अप्रैल तक का समय दिया है, जिसमें शराब नीति मामले में निचली अदालत द्वारा उन्हें आरोपमुक्त करते समय निदेशालय के खिलाफ की गई ‘अनुचित’ टिप्पणियां हटाने का अनुरोध किया गया है।

न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने केजरीवाल और अन्य आरोपियों के वकीलों द्वारा अधिक समय की मांग किये जाने पर नाराजगी व्यक्त की और कहा कि उच्च न्यायालय दो अप्रैल को अगली सुनवाई के दौरान इस मामले में अंतिम सुनवाई की तारीख तय करेगी।

न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा, ‘‘मुझे नहीं पता कि आप जवाब दाखिल क्यों नहीं कर रहे हैं। अगर आपको वाकई जवाब दाखिल करना जरूरी लगता है, तो आपको करना चाहिए था। वे बस इतना कह रहे हैं कि (निचली अदालत के) न्यायाधीश को वह नहीं लिखना चाहिए था, जो उन्होंने लिखा है।’’

न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा, ‘‘दो अप्रैल तक अपना जवाब दाखिल कर दीजिए। उसके बाद हम अंतिम सुनवाई की तारीख तय करेंगे।’’

प्रवर्तन निदेशालय के वकील ने कहा कि याचिका का जवाब दाखिल करने की कोई आवश्यकता नहीं है और यह मामले में देरी करने का प्रयास है।

ईडी की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने दलील दी कि एजेंसी की याचिका का आरोपियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, क्योंकि चुनौती केवल सीबीआई मामले में केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य को आरोपमुक्त करते समय निचली अदालत के न्यायाधीश द्वारा (केंद्रीय जांच) एजेंसी के खिलाफ की गई टिप्पणियों तक ही सीमित है।

आरोपियों में से एक के वकील ने कहा कि संक्षिप्त उत्तर देना आवश्यक है और इसके लिए समय चाहिए, क्योंकि आरोपमुक्त करने का आदेश 600 पृष्ठों का है।

न्यायमूर्ति शर्मा ने टिप्पणी की कि ईडी का मामला उन सभी 600 पृष्ठों से संबंधित नहीं है।

उच्च न्यायालय ने 10 मार्च को केजरीवाल और अन्य लोगों से ईडी की याचिका पर जवाब मांगा था।

याचिका में ईडी ने कहा है कि निचली अदालत की टिप्पणियां सीबीआई के मामले से पूरी तरह से अप्रासंगिक थीं। उसने कहा कि ईडी न तो उन कार्यवाही में पक्षकार थी और न ही उसे सुनवाई का कोई अवसर दिया गया था।

ईडी की याचिका में कहा गया, “यदि इस प्रकार की व्यापक, अनियंत्रित और निराधार टिप्पणियों को स्वीकार कर लिया गया तो आम जनता के साथ-साथ याचिकाकर्ता को भी गंभीर और अपूरणीय क्षति पहुंचेगी।”

उसमें कहा गया, ‘‘इसलिए, पीएमएलए (धनशोधन निवारण अधिनियम) के तहत प्रवर्तन निदेशालय द्वारा स्वतंत्र रूप से की गई जांच से संबंधित उपरोक्त अनुच्छेदों (टिप्पणियों) को हटा दिया जाना चाहिए, क्योंकि यह न्यायिक हस्तक्षेप का स्पष्ट मामला है।’’

निचली अदालत ने 27 फरवरी को दिल्ली शराब नीति मामले में केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य को आरोपमुक्त कर दिया तथा सीबीआई को फटकार लगाते हुए कहा कि उसका मामला न्यायिक जांच में पूरी तरह से खरा नहीं उतर सका और पूरी तरह से अविश्वासनीय साबित हुआ।

निचली अदालत ने यह भी कहा था कि धनशोधन निवारण अधिनियम के प्रावधान लगाये जाने से आरोपियों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता खतरे में पड़ गई थी, जिससे ‘संवैधानिक रूप से महत्वपूर्ण चिंता’ पैदा होती है।

भाषा राजकुमार सुरेश

सुरेश