मधु भीड़ हत्या मामला: अदालत ने 12 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई, पहले आरोपी को बरी किया

मधु भीड़ हत्या मामला: अदालत ने 12 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई, पहले आरोपी को बरी किया

मधु भीड़ हत्या मामला: अदालत ने 12 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई, पहले आरोपी को बरी किया
Modified Date: May 25, 2026 / 09:53 pm IST
Published Date: May 25, 2026 9:53 pm IST

कोच्चि, 25 मई (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने 2018 के अट्टापडी मधु भीड़ हत्या मामले में 12 आरोपियों को सोमवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जबकि पहले आरोपी को बरी कर दिया और 16वें आरोपी की सजा में संशोधन किया।

अपने आदेश में, अदालत ने इस मामले को भीड़ द्वारा किया गया हमला बताया, जिसमें एक आदिवासी व्यक्ति को “ढूंढकर सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया” और फिर उसकी हत्या कर दी गई।

न्यायमूर्ति ए. राजा विजयराघवन और न्यायमूर्ति के.वी. जयकुमार की खंडपीठ ने कहा कि अभियुक्तों को आईपीसी की धारा 304 भाग-2 के तहत दंडनीय अपराध का दोषी पाया गया है, जिसे एससी/एसटी (पीओए) अधिनियम की धारा 3(2)(वी) और आईपीसी की धारा 149 के साथ पढ़ा जाना चाहिए।

पलक्कड़ जिले के अट्टापडी स्थित चिंदक्की ओरु निवासी मधु (27) की फरवरी 2018 में कथित तौर पर एक दुकान से चावल और किराने का सामान चोरी करने के आरोप में भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी।

मधु को भीड़ द्वारा पकड़े जाने और अपमानित किए जाने की तस्वीरें सामने आने के बाद पूरे केरल में व्यापक आक्रोश फैल गया था।

मन्नारक्काड विशेष न्यायालय ने अप्रैल 2023 में 16 आरोपियों में से14 लोगों को दोषी ठहराया था, जिनमें से 13 को गैर-इरादतन हत्या और अन्य अपराधों के लिए सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी। उच्च न्यायालय अभियुक्तों, राज्य सरकार और पीड़ित परिवार द्वारा दायर अपीलों की सुनवाई कर रहा था।

राज्य की अपील पर फैसला सुनाते हुए, खंडपीठ ने 12 आरोपियों की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया और 16वें आरोपी की सजा को तीन महीने से बढ़ाकर एक साल कर दिया।

पीड़ित परिवार की ओर से पेश हुए अधिवक्ता राधाकृष्णन ने बताया कि अदालत ने 12 आरोपियों को तीन आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, जो साथ-साथ चलेगी। उन्होंने कहा कि संबंधित पक्षों से परामर्श करने के बाद सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर की जाएगी।

अदालत ने प्रथम आरोपी हुसैन की दोषसिद्धि को भी रद्द कर दिया, क्योंकि उसके खिलाफ सबूत अविश्वसनीय पाए गए। अदालत ने चौथे और ग्यारहवें आरोपी की बरी किये जाने के फैसले को बरकरार रखा।

पीठ ने गौर किया कि मधु को “सार्वजनिक रूप से पीटा गया, उसके कपड़े उतार दिए गए, उसे अर्धनग्न अवस्था में घुमाया गया, सोशल मीडिया पर अपमानित किया गया और लगातार हिंसा का शिकार बनाया गया, जिसके बाद उसकी चोटों के कारण उसकी मृत्यु हो गई।”

इसमें आगे कहा गया कि आरोपी को “सामुदायिक प्रतिशोध’’ का शिकार बनाया गया, घुमाया गया और एक ‘ट्रॉफी’ के तौर पर प्रदर्शित किया गया।

अदालत ने आगे कहा कि मधु ने “भूख के कारण खाना चुराया था” और कहा कि “बीमारी, गरीबी और सामाजिक बहिष्कार के कारण उसका जीवन बेहद नाजुक स्थिति में पहुंच गया था।”

बारह आरोपियों को आजीवन कारावास के साथ-साथ प्रत्येक पर दो-दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। अदालत ने विभिन्न प्रावधानों के तहत 50,000 रुपये से लेकर दो लाख रुपये तक का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया, और जुर्माना न भरने पर अतिरिक्त कारावास की सजा का प्रावधान किया।

पीठ ने निर्देश दिया कि “सभी सजाएं एक साथ चलेंगी” और इसने पीड़ित परिवार को 30 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।

अदालत ने कहा कि यह “केरल की अदालतों के समक्ष आने वाला यह भीड़ हत्या का पहला मामला” था। इसने चश्मदीदों की गवाही के विफल होने की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि कई गवाह मुकर गये।

अधिवक्ता राधाकृष्णन ने पहले आरोपी के बरी होने की भी आलोचना करते हुए कहा कि इससे “गलत संदेश” जाता है, साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष मजबूत सबूत पेश करने में सफल रहा था।

हालांकि, अभियोजन पक्ष के वकील जीवेश ने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि बरी होने का कारण गवाह का मुकरना और मुख्य आरोपी के खिलाफ कमजोर पहचान साक्ष्य थे। उन्होंने आगे कहा कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों ने निर्णायक भूमिका निभाई।

भाषा प्रशांत सुरेश

सुरेश


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