मप्र: बारिश और जलभराव के बावजूद मझगांय सिंचाई परियोजना से प्रभावित लोगों का आंदोलन 16वें दिन जारी

मप्र: बारिश और जलभराव के बावजूद मझगांय सिंचाई परियोजना से प्रभावित लोगों का आंदोलन 16वें दिन जारी

मप्र: बारिश और जलभराव के बावजूद मझगांय सिंचाई परियोजना से प्रभावित लोगों का आंदोलन 16वें दिन जारी
Modified Date: September 27, 2026 / 03:15 pm IST
Published Date: September 27, 2026 3:15 pm IST

पन्ना (मध्यप्रदेश), 27 सितंबर (भाषा) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में भारी बारिश और जलभराव के बावजूद निर्माणाधीन मझगांय एवं रुंज मध्यम सिंचाई परियोजना से प्रभावित किसानों और आदिवासियों का आंदोलन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा।

प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि परियोजना से प्रभावित गांवों में कई घर जलमग्न हो गए हैं, कुछ घरों में दो से तीन फुट तक पानी भर गया है और अनाज, कपड़े और अन्य घरेलू सामान को नुकसान पहुंचा है।

हालांकि, अधिकारियों ने कहा कि पन्ना जिला प्रशासन नए सिरे से सर्वेक्षण कर रहा है और प्रभावित परिवारों को मुआवजा वितरित कर रहा है।

जिला मुख्यालय से 55 किलोमीटर दूर अजयगढ़ क्षेत्र में मझगांय बांध के पास बनहरीकला टपरियन में उचित मुआवजा, पुनर्वास और अधिकारों की मांग को लेकर जारी इस आंदोलन का नेतृत्व किसान समर्थक संगठन जय किसान संगठन के अमित भटनागर कर रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि मंडलिया, टपरिया और कुंवरपुर सहित कई गांव जलभराव से प्रभावित हुए हैं।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे पिछले 15 दिनों से ‘चिता’ (चिता प्रदर्शन) और ‘जल सत्याग्रह’ सहित विभिन्न रूपों के माध्यम से प्रदर्शन कर रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि कई महिलाएं और अन्य प्रदर्शनकारी कई दिनों तक पानी और बारिश में रहने के बाद बीमार पड़ गए थे, कुछ के पैरों में घाव और त्वचा संबंधी समस्याएं पैदा हुईं।

किसान संगठन ने दावा किया कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम की प्रक्रिया की धारा 11 के तहत अधिसूचना जारी हुए आठ साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन कई पात्र परिवार अब भी मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों के अनुसार, कुछ परिवारों को 12.5 लाख रुपये के घोषित पैकेज के बदले केवल पांच लाख रुपये मिले, जबकि घरों, कुओं, पेड़ों और अन्य संपत्तियों के लिए मुआवजा अब भी लंबित है।

भटनागर ने कहा कि संगठन विकास का विरोध नहीं करता, लेकिन प्रभावित आदिवासी परिवारों के कानूनी अधिकारों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जा सकती।

उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों के नुकसान का तत्काल आकलन कर पूर्ण मुआवजा, पुनर्वास और राहत की व्यवस्था की जानी चाहिए।

प्रदर्शनकारियों ने भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन अधिनियम, 2013 में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा 38 का भी हवाला दिया और मुआवजा भुगतान और पुनर्वास प्रक्रिया के पूरा होने से पहले घरों के जलमग्न होने पर चिंता जताई।

भाषा सं ब्रजेन्द्र संतोष

संतोष


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