(तस्वीरों के साथ)
अहमदाबाद, 12 जनवरी (भाषा) भारत की अपनी पहली यात्रा पर आए जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने सोमवार को कहा कि महात्मा गांधी की विरासत भारतीयों और जर्मनों को दोस्तों के रूप में एकजुट करती है और उनकी शिक्षाओं की आज पहले से कहीं अधिक आवश्यकता है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जर्मनी के चांसलर मर्ज ने सोमवार सुबह अहमदाबाद में साबरमती आश्रम पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कुछ मिनट पहले ही आश्रम पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने जर्मन चांसलर का वहां पहुंचने पर स्वागत किया।
राष्ट्रपिता की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद दोनों नेताओं ने आश्रम के अंदर एक कमरे ‘हृदय कुंज’ का दौरा किया, जहां भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान महात्मा गांधी और उनकी पत्नी कस्तूरबा रहते थे।
आश्रम में मर्ज ने यह भी देखा कि कैसे ‘चरखे’ का उपयोग करके खादी का सूत काता जाता है।
आश्रम की आगंतुक पुस्तिका में एक नोट में मर्ज ने कहा, ‘‘प्रत्येक व्यक्ति की स्वतंत्रता और गरिमा की शक्ति में महात्मा गांधी का अटूट विश्वास आज भी हमें प्रेरित करता है। यह विरासत भारतीयों और जर्मनों को एक ऐसी दुनिया में दोस्तों के रूप में एकजुट करती है, जिसे गांधी की शिक्षाओं की पहले से कहीं अधिक आवश्यकता हो सकती है।’’
गांधी आश्रम के नाम से भी मशहूर साबरमती आश्रम की स्थापना महात्मा गांधी ने 1917 में की थी। 1917 से 1930 तक यह गांधीजी का निवास रहा और भारत के स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख केंद्रों में से एक था।
ऐतिहासिक आश्रम में राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि देने के बाद दोनों नेता साबरमती रिवरफ्रंट पहुंचे, जहां प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव-2026 का उद्घाटन किया और बाद में चांसलर मर्ज के साथ पतंगबाजी का आनंद लिया।
कार्यक्रम स्थल पर मोदी और मर्ज ने महिला कारीगरों से बातचीत की और पतंग बनाने की प्रक्रिया को समझा। उद्घाटन के बाद दोनों नेताओं ने खुले वाहन में सफर किया और पतंग भी उड़ाई।
गुजरात सरकार की एक विज्ञप्ति के अनुसार, 50 देशों के 135 पतंगबाज और भारत से लगभग 1,000 पतंग प्रेमी अहमदाबाद में अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव-2026 में भाग ले रहे हैं।
इसमें कहा गया है कि महोत्सव के रूप में पतंगबाजों ने पिछले दो दिनों के दौरान राजकोट, सूरत, धोलावीरा (कच्छ में) और ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ (नर्मदा) जैसी जगहों का दौरा किया और आगंतुकों को पतंगबाजी से मंत्रमुग्ध कर दिया है। अहमदाबाद में यह महोत्सव 14 जनवरी तक जारी रहेगा।
यह त्योहार हर साल ‘उत्तरायण’ से पहले आयोजित किया जाता है, जिसे मकर संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है, जो 14 जनवरी को पड़ता है और सूर्य की उत्तर की ओर यात्रा तथा गर्मी के मौसम की ओर बढ़ने का प्रतीक है।
पिछले साल इस महोत्सव ने पूरे गुजरात में 3.83 लाख से अधिक आगंतुकों को आकर्षित किया था।
‘अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव’ के माध्यम से गुजरात पर्यटन आगंतुकों को धोलावीरा और ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ जैसे प्रमुख सांस्कृतिक और पर्यटन स्थलों की ओर आकर्षित कर रहा है।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस साल अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव देखने के लिए पांच लाख से अधिक पर्यटकों के गुजरात आने की उम्मीद है।
भाषा गोला मनीषा
मनीषा