(सौम्या शुक्ला)
नयी दिल्ली, 12 जनवरी (भाषा) साइबर ठगों ने दिल्ली क्षेत्र में पिछले एक साल में भोले-भाले लोगों से कुल 1,250 करोड़ रुपये की ठगी की। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
देशव्यापी आंकड़ा लगभग 20,000 करोड़ रुपये या किसी राज्य के बजट के बराबर होने का अनुमान है।
पिछले हफ्ते दिल्ली की ग्रेटर कैलाश कॉलोनी में एक बुजुर्ग दंपति के साथ 14.85 करोड़ रुपये की ठगी हुई थी।
पुलिस ने बताया कि 2024 में अपराधियों ने – जो आमतौर पर कंबोडिया, वियतनाम और लाओस में स्थित हैं और ज्यादातर चीनी आकाओं के इशारे पर काम करते हैं – दिल्ली में सामूहिक रूप से 1,100 करोड़ रुपये की ठगी की।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 1,250 करोड़ रुपये हो गया। अच्छी बात यह है कि ठगी की रकम वापस हासिल करने की भी दर 2024 के 10 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 24 प्रतिशत हो गई।
यह बात 81 वर्षीय ओम तनेजा और उनकी पत्नी इंदिरा (77) के लिए थोड़ी राहत भरी है, जिन्हें 16 दिनों की अवधि में ‘साइबर अरेस्ट’ के जरिये ठगा गया।
तनेजा ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘हमने जीवन भर की सारी बचत गंवा दी। साइबर ठगों ने हमें बार-बार गिरफ्तारी और गंभीर अंजाम भुगतने की धमकी दी।’’
उन्होंने कहा कि खुद को दूरसंचार विभाग का कर्मचारी बताते हुए एक व्यक्ति ने उनकी पत्नी को व्हाट्सएप पर फोन किया। फोन करने वाले और उसके साथियों ने यह कहकर कि उनकी पत्नी का फोन अवैध गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, दंपति को डरा कर अपने जाल में फंसा लिया।
इस मामले के मद्देनजर, एक अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने ऐसे जालसाजों के तौर-तरीकों को समझाते हुए बताया कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामले, निवेश धोखाधड़ी के साथ, उन दो सबसे आम तरीकों के रूप में उभरे हैं जिनमें लोग अपनी गाढ़ी कमाई गंवा रहे हैं।
जांचकर्ताओं ने कहा कि इनमें से अधिकांश ठग कंबोडिया, लाओस और वियतनाम जैसे दक्षिण पूर्व एशियाई देशों से ठगी को अंजाम देते हैं, जहां से चीनी संचालकों द्वारा संचालित गिरोह दुनिया भर के लोगों को अपना शिकार बना सकते हैं।
इन स्थानों से, आरोपी अवैध सिम बॉक्स इंस्टॉलेशन का उपयोग करते हैं, जिससे दूरसंचार नेटवर्क को दरकिनार करते हुए अंतरराष्ट्रीय फोन को स्थानीय भारतीय नंबरों के रूप में दिखाया जाता है।
अधिकारी ने कहा, ‘‘ये फोन वास्तव में विदेश से किये जाते हैं, लेकिन अवैध सिम बॉक्स उपकरणों का उपयोग करके इन्हें घरेलू दिखाया जाता है, जिससे आरोपियों को पकड़े जाने से बचने में मदद मिलती है, जबकि पीड़ितों के बीच भय और बेचैनी का माहौल बनता है।’’
पुलिस ने कहा कि अवैध बैंक खाते एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं, क्योंकि इनसे धन के लेन-देन की कई परतें बन जाती हैं जिनका पता लगाना मुश्किल होता है।
हाल में, दिल्ली पुलिस ने ‘सेंटा की सीख’ नामक जागरूकता अभियान शुरू किया। इस पहल के तहत दिल्ली के सभी जिलों में क्यूआर कोड के माध्यम से नागरिकों को ऑनलाइन ठगी के प्रति सतर्क किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि कर्मचारियों की उचित सतर्कता और संवेदनशीलता सुनिश्चित करने के लिए बैंक अधिकारियों के साथ नियमित रूप से समन्वय बैठकें भी आयोजित की जा रही हैं।
साइबरपीस के संस्थापक और वैश्विक अध्यक्ष मेजर विनीत कुमार ने पीटीआई-भाषा को बताया कि पश्चिम बंगाल की एक स्थानीय अदालत ने पिछले साल डिजिटल गिरफ्तारी साइबर धोखाधड़ी मामले में नौ व्यक्तियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस तरह के मामलों में देश में यह पहली सजा है।
भाषा सुभाष मनीषा
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