माणिक साहा ने ढाका के रास्ते अगरतला-कोलकाता बस सेवा को बहाल करने के प्रयास का स्वागत किया

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माणिक साहा ने ढाका के रास्ते अगरतला-कोलकाता बस सेवा को बहाल करने के प्रयास का स्वागत किया

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  • Publish Date - February 21, 2026 / 07:37 PM IST,
    Updated On - February 21, 2026 / 07:37 PM IST

अगरतला, 21 फरवरी (भाषा) त्रिपुरा के मुख्यमंत्री मणिक साहा ने कोलकाता को ढाका के रास्ते अगरतला से जोड़ने वाली भारत-बांग्लादेश बस सेवा को फिर से शुरू करने की पहल का शनिवार को स्वागत किया।

बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल के कारण ‘रॉयल-मैत्री अंतरराष्ट्रीय बस सेवा’ पिछले एक साल से निलंबित है, जिससे वीजा संबंधी समस्याएं उत्पन्न हुईं और यात्रियों की संख्या में भारी गिरावट आई है। स्थिति में सुधार होने के साथ, बस संचालक अब सेवा को पुनः शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं और इसके लिये परीक्षण शुरू किया है।

मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से कहा, ‘‘मैं कोलकाता को ढाका के रास्ते अगरतला से जोड़ने वाली भारत-बांग्लादेश बस सेवा को फिर से शुरू करने के कदम का स्वागत करता हूं। बांग्लादेश में निर्वाचित सरकार के गठन के साथ अनिश्चितता समाप्त हो गई है। यह द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक अच्छा संकेत है। हमें उम्मीद है कि अन्य मुद्दों का भी समाधान किया जाएगा।”

भारत-बांग्लादेश बस सेवा के निलंबन के एक साल बाद संचालक ने सेवा को फिर से शुरू करने के लिए ढाका से पश्चिम त्रिपुरा के कृष्णानगर डिपो में एक बस मंगवाई।

अंतरराष्ट्रीय बस सेवा के प्रबंधक मनोरंजन देवनाथ ने बताया कि पड़ोसी देश में राजनीतिक उथल-पुथल के कारण भारत-बांग्लादेश बस सेवा को एक वर्ष के लिए निलंबित कर दिया गया था।

उन्होंने कहा, “इस वजह से यात्रियों की संख्या अब तक के सबसे निचले स्तर पर आ गई थी और वीजा की समस्या के कारण हमें सेवा बंद करनी पड़ी थी। बांग्लादेश में स्थिति में सुधार होने के साथ, हम अगले सप्ताह तक बस सेवा फिर से शुरू करना चाहते हैं।’’

देवनाथ ने कहा, “आज परीक्षण के तौर पर बस कृष्णानगर बस डिपो (अगरतला) से ढाका के लिए रवाना हुई। यह दो-तीन दिन तक जारी रहेगा। एक बार व्यवस्था स्थिर हो जाने पर हम सप्ताह में तीन बार बस सेवा को फिर से शुरू करेंगे।”

अगरतला से ढाका होते हुए कोलकाता तक की लगभग 500 किलोमीटर की यात्रा का किराया 2800 रुपये है। अगरतला से ट्रेन को गुवाहाटी होते हुए कोलकाता पहुंचने में 1567 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है।

भाषा यासिर दिलीप

दिलीप