मणिपुर: मुख्यमंत्री ने शांति के लिए जोमी प्रतिनिधिमंडल को बातचीत जारी रखने का भरोसा दिलाया

मणिपुर: मुख्यमंत्री ने शांति के लिए जोमी प्रतिनिधिमंडल को बातचीत जारी रखने का भरोसा दिलाया

मणिपुर: मुख्यमंत्री ने शांति के लिए जोमी प्रतिनिधिमंडल को बातचीत जारी रखने का भरोसा दिलाया
Modified Date: July 31, 2026 / 08:13 pm IST
Published Date: July 31, 2026 8:13 pm IST

इंफाल, 31 जुलाई (भाषा) मणिपुर के चूड़ाचांदपुर जिले के तीन प्रमुख जोमी संगठनों के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह से मुलाकात की।

मुख्यमंत्री ने उन्हें भरोसा दिलाया कि राज्य में जातीय संघर्ष का शांतिपूर्ण, समावेशी और स्थायी समाधान निकालने के लिए सरकार सभी पक्षों के साथ बातचीत जारी रखेगी।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, 14 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में जोमी काउंसिल, ‘यूनिफाइड जोऊ ऑर्गनाइजेशन’ (यूजेडओ) और ‘जोमी चीफ्स एसोसिएशन’ के प्रतिनिधि शामिल थे। उन्होंने इंफाल स्थित सचिवालय में मुख्यमंत्री से मुलाकात की।

बयान के मुताबिक, यह बैठक अहम थी, क्योंकि मई 2023 में राज्य में जातीय हिंसा शुरू होने के बाद पहली बार इन तीनों संगठनों के प्रतिनिधि चूड़ाचांदपुर से एक साथ इंफाल पहुंचे और मुख्यमंत्री से मिले।

बयान में बताया गया कि यह बैठक राज्य में बेहतर होती कानून-व्यवस्था और समुदायों के बीच धीरे-धीरे बहाल हो रही आवाजाही का प्रतीक है।

जोमी कई जनजातियों का समूह है, जो मुख्य रूप से चूड़ाचांदपुर जिले में रहते हैं। उनकी जातीय और भाषाई समानताएं कुकी समुदाय से हैं।

सिंह ने बैठक के दौरान दोहराया कि सरकार शांति को बढ़ावा देने, सभी समुदायों के बीच सौहार्द बनाए रखने और सामान्य जीवन की बहाली के लिए परिस्थितियां तैयार करने के वास्ते प्रतिबद्ध है।

इस बीच, एक महिला संगठन के सदस्यों ने कानून-व्यवस्था की मौजूदा स्थिति समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए शुक्रवार को यहां प्रदर्शन किया और मणिपुर विधानसभा का तत्काल सत्र बुलाने की मांग की।

महिला संगठन इमागी मीरा के सदस्यों ने विधानसभा परिसर के सामने प्रदर्शन किया।

इमागी मीरा की अध्यक्ष सुजाता थोखचोम ने संवाददाताओं से कहा, “हम राज्य के कई मुद्दों पर चर्चा के लिए विधानसभा सत्र बुलाने की मांग कर रहे हैं, जिसमें मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति और ‘ऑपरेशन निलंबन’ पर प्रस्ताव भी शामिल है।”

उन्होंने कहा कि सदन के सभी सदस्यों को इस सत्र के लिए एक साथ आना चाहिए, फिर चाहे वे सत्तारूढ़ दल से हों या विपक्ष से।

सुजाता ने कहा, “अब तक राज्य को बचाने के लिए विधानसभा की ओर से कोई फैसला नहीं लिया जा सका है।”

भाषा जितेंद्र पारुल

पारुल


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