मणिपुर कांग्रेस का प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

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मणिपुर कांग्रेस का प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

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  • Publish Date - September 25, 2026 / 02:32 PM IST,
    Updated On - September 25, 2026 / 02:32 PM IST

इंफाल, 25 सितंबर (भाषा) मणिपुर कांग्रेस के सदस्यों ने शुक्रवार को यहां प्रदर्शन किया और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर निर्वाचन आयोग में असंतोष होने का दावा करने वाली एक समाचार पत्र की रिपोर्ट के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।

प्रदर्शनकारियों ने लैंफेल स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के सामने कुमार के पुतले जलाए और नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिसकर्मियों ने आंसू गैस के कुछ गोले दागे।

उन्होंने कुमार की गिरफ्तारी की भी मांग की और उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए फैसलों तथा मतदाता सूची में किए गए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की।

प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस के एक नेता ने कहा, ‘‘यह प्रदर्शन कांग्रेस की जवाबदेही, पारदर्शिता और भारत की चुनावी प्रक्रिया की अखंडता की रक्षा की मांग को दर्शाता है।” उन्होंने कहा कि पार्टी प्रत्येक नागरिक के स्वतंत्र रूप से मतदान करने के अधिकार और हर वोट की निष्पक्ष गिनती के लिए मजबूती से खड़ी है।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि जेन-जी को मतदाता सूची से बाहर किए जाने के लिए निशाना बनाया जा रहा है और उसने मांग दोहराई है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त कुमार को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।

पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए याद दिलाया कि 1988 में राजीव गांधी ने मतदान की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी थी। कांग्रेस ने कहा कि एक प्रधानमंत्री ने ‘जेन-जी’ को मतदान का अधिकार दिया, जबकि दूसरा प्रधानमंत्री “अनुचित तरीकों से उसे छीनने” के लिए प्रतिबद्ध है।

यह घटनाक्रम एक अंग्रेजी दैनिक की उस रिपोर्ट के बाद सामने आया, जिसमें कहा गया था कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार उन फैसलों और आदेशों पर रिकॉर्ड में आपत्ति जताई थी, जिनके बारे में उनका कहना था कि वे उनकी जानकारी के बिना जारी किए गए थे। यह उस समय हुआ, जब एसआईआर को देशभर में लागू करने की निगरानी पूरा आयोग कर रहा था।

रिपोर्ट के अनुसार, उनकी आपत्तियां वैधानिक मतदाता पंजीकरण फॉर्म-6 में किए गए बदलावों के तरीके, मतदाता सूचियों में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया तथा मतदाता सूची डेटाबेस पर केंद्रीकृत नियंत्रण से जुड़ी थीं।

एसआईआर प्रक्रिया को लेकर अपने दो आयुक्तों की ओर से उठाए गए सवालों के कारण आलोचना का सामना कर रहे चुनाव आयोग ने कहा कि किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां आना सामान्य प्रक्रिया है।

आयोग ने कहा कि उसके सभी आदेशों को पूरा कानूनी समर्थन प्राप्त है और वे निर्धारित वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करते हैं।

निर्वाचन आयोग ने एक बयान में यह भी कहा कि केवल तीनों आयुक्त ही नहीं, बल्कि आयोग का प्रत्येक अधिकारी चुनाव प्रणाली में सुधार के लिए आयोग को सुझाव देने का पूरा अधिकार रखता है।

भाषा रंजन मनीषा

मनीषा