मणिपुर में एनआरसी: प्रदर्शनकारियों ने रैलियां निकालीं, मुख्यमंत्री और गृहमंत्री के पुतले जलाए

मणिपुर में एनआरसी: प्रदर्शनकारियों ने रैलियां निकालीं, मुख्यमंत्री और गृहमंत्री के पुतले जलाए

मणिपुर में एनआरसी: प्रदर्शनकारियों ने रैलियां निकालीं, मुख्यमंत्री और गृहमंत्री के पुतले जलाए
Modified Date: August 19, 2026 / 07:53 pm IST
Published Date: August 19, 2026 7:53 pm IST

इंफाल, 19 अगस्त (भाषा) मणिपुर में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) को अद्यतन करने की मांग को लेकर 48 घंटे की आम हड़ताल बुधवार को समाप्त हो गई। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने घाटी के विभिन्न जिलों में रैलियां निकालीं और नेताओं के पुतले जलाए।

यह हड़ताल ‘कैंपेन फॉर जस्ट एंड फेयर डिलिमिटेशन’ (जेएफडी) ने राज्य में जनगणना होने से पहले एनआरसी को अद्यतन करने की मांग को लेकर आहूत की थी।

इंफाल पूर्वी जिले के खुरई लामलोंग में बंद समर्थकों ने मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह और गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजाम के पुतले फूंके।

प्रदर्शनकारियों ने ‘‘एनआरसी नहीं तो जनगणना नहीं’’ जैसे नारे लगाए और मांग की कि जब तक आंतरिक रूप से विस्थापित लोग (आईडीपी) अपने मूल स्थानों पर नहीं लौटते, तब तक जनगणना नहीं कराई जाए।

इंफाल पश्चिम जिले के सिंगजामेई में भी सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने रैली निकाली और अपनी मांगों को लेकर करीब दो किलोमीटर तक मार्च किया।

इंफाल पश्चिम, इंफाल पूर्व, बिष्णुपुर और थौबल जिलों में कई स्थानों पर सड़कों को बाधित किया गया था। बंद समर्थकों ने निजी वाहनों और सुरक्षा बलों के वाहनों को आगे बढ़ने से रोका और उन्हें लौटने को कहा।

अधिकारियों ने बताया कि थौबल जिले में पर्यवेक्षकों, गणनाकर्ताओं और क्षेत्रीय प्रशिक्षकों के लिए आयोजित जनगणना प्रशिक्षण कार्यक्रम भी रद्द कर दिया गया।

इस बीच, मणिपुर शिक्षक संघों की परिषद (सीओटीए) ने कहा कि जनगणना संबंधी प्रशिक्षण जिस परिस्थितियों में कराया जा रहा है, उससे वह ‘‘बहुत व्यथित’’ है।

सीओटीए ने कहा, ‘‘जनगणना के लिए गणनाकर्ता और पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए शिक्षक सरकारी आदेशों का पालन करते हुए प्रशिक्षण सत्रों में शामिल होने के दौरान शर्मिंदगी, अपमान और कई तरह की बाधाओं का सामना कर रहे हैं।’’

सीओटीए ने राज्य सरकार और एनआरसी अद्यतन करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे नागरिक समाज संगठनों से जल्द से जल्द आपसी सहमति से समाधान निकालने की अपील की।

वहीं, जेएफडी ने घोषणा की कि आंदोलन के अगले चरण के तहत वह बृहस्पतिवार से राज्य और केंद्र सरकार के कार्यालयों में कामकाज का बहिष्कार करेगा।

जेएफडी के संयोजक जीतेंद्र निंगोम्बा ने संवाददाताओं से कहा कि पानी, बिजली और चिकित्सा जैसी आवश्यक सेवाओं को इस बहिष्कार से बाहर रखा जाएगा।

भाषा अमित वैभव

वैभव


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