मराठा-कुनबी प्रमाणपत्र खारिज होने की दर केवल 0.3 प्रतिशत: उदय सामंत

मराठा-कुनबी प्रमाणपत्र खारिज होने की दर केवल 0.3 प्रतिशत: उदय सामंत

मराठा-कुनबी प्रमाणपत्र खारिज होने की दर केवल 0.3 प्रतिशत: उदय सामंत
Modified Date: September 9, 2026 / 10:06 pm IST
Published Date: September 9, 2026 10:06 pm IST

छत्रपति संभाजीनगर, नौ सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र के उद्योग मंत्री उदय सामंत ने बुधवार को कहा कि मराठा समुदाय के सदस्यों के बीच कुनबी प्रमाणपत्र खारिज होने की दर केवल 0.3 प्रतिशत है। उन्होंने दावा किया कि इस मुद्दे पर भ्रम फैलाया जा रहा है।

सामंत यहां मराठा आरक्षण उप-समिति की बैठक में शामिल होने के बाद पत्रकारों से बात कर रहे थे। दूसरी ओर, आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे की भूख हड़ताल बुधवार को 12वें दिन में प्रवेश कर गई। इस दौरान सामंत के सहयोगी एवं विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) प्रसाद लाड ने जरांगे से इलाज कराने की अपील की।

जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में 29 अगस्त से अनशन कर रहे जरांगे अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग कर रहे हैं। इसमें हैदराबाद और सतारा गजट के रिकॉर्ड को लागू करना और पात्र मराठाओं को कुनबी जाति प्रमाणपत्र जारी करना शामिल है।

सामंत ने कहा, ‘मराठवाड़ा के आठ जिलों में कुनबी जाति प्रमाणपत्र पाने के लिए 3,17,569 लोगों ने आवेदन किया था। इनमें से 3,16,977 लोगों को प्रमाणपत्र मिल चुके हैं। केवल 548 आवेदन खारिज किए गए हैं, जिनके कारण बताए जा सकते हैं। केवल 44 आवेदनों पर निर्णय होना बाकी है।’

मंत्री ने बताया कि 10 प्रतिशत एसईबीसी (सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग) आरक्षण के तहत भी समुदाय के सदस्यों को 2,95,305 प्रमाणपत्र दिए गए हैं।

उन्होंने कहा, ‘प्रमाणपत्र खारिज होने की दर केवल 0.3 प्रतिशत है। प्रमाणपत्रों को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है और यह बात मनोज जरांगे तक भी पहुंचाई जा रही है।’

सामंत ने बताया कि आवेदन मुख्य रूप से इसलिए खारिज हुए क्योंकि पारिवारिक वंशावली सिद्ध नहीं हो सकी या रिकॉर्ड अधूरे या अनुपलब्ध थे।

एमएलसी प्रसाद लाड ने कहा कि राज्य सरकार जरांगे की मांगों को पूरा करने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने जरांगे से इलाज कराने की भी अपील की।

भाषा सुमित प्रशांत

प्रशांत


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