खनन कानून का विरोध करते हुए बीजद ने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग की

खनन कानून का विरोध करते हुए बीजद ने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग की

खनन कानून का विरोध करते हुए बीजद ने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग की
Modified Date: September 9, 2026 / 09:40 pm IST
Published Date: September 9, 2026 9:40 pm IST

भुवनेश्वर, नौ सितंबर (भाषा) विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) ने बुधवार को भुवनेश्वर स्थित लोक भवन के निकट खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम के खिलाफ प्रदर्शन किया।

पार्टी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हस्तक्षेप की मांग करते हुए ओडिशा के वित्तीय हितों और देश के संघीय ढांचे की रक्षा सुनिश्चित करने की अपील की।

बाद में पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल हरि बाबू कम्भमपति से मुलाकात की और राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में बीजद ने कहा कि ओडिशा ने अपनी खनिज संपदा के जरिए भारत के औद्योगिक और आर्थिक विकास में बहुत बड़ा योगदान दिया है, इसलिए वह अपने प्राकृतिक संसाधनों से प्राप्त फायदों में अपने जायज हिस्से का हकदार है।

इसमें कहा गया है, “हमारे सामने जो मुद्दा है, वह सिर्फ किसी खास वित्तीय अधिकार का नहीं है, बल्कि संवैधानिक संघवाद, वित्तीय स्वायत्तता, राज्यों के हितों की सुरक्षा और ओडिशा के अपनी प्राकृतिक संपदा से लाभ उठाने के अधिकार जैसे व्यापक सिद्धांतों से जुड़ा है।”

पार्टी ने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाएं कि ओडिशा के “वैध संवैधानिक और वित्तीय अधिकारों” की रक्षा हो।

बीजद ने कहा कि ओडिशा में मौजूद लौह अयस्क, कोयला, बॉक्साइट, क्रोमाइट और अन्य खनिजों का भंडार राज्य की प्राकृतिक संपदा का एक बड़ा हिस्सा है और राज्य के राजस्व का महत्वपूर्ण स्रोत है।

ज्ञापन में कहा गया, “इसलिए, कोई भी ऐसा विधायी कदम जो खदानों और खनिजों वाली जमीनों के संबंध में राज्य के अधिकारों और वित्तीय हितों को काफी हद तक प्रभावित करता हो, उसके ओडिशा पर दूरगामी परिणाम होते हैं और इसकी सावधानीपूर्वक संवैधानिक और कानूनी जांच की जानी चाहिए।”

इस बीच कांग्रेस विधायक दल के नेता रामचंद्र कदम ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी पार्टी एमएमडीआर संशोधन अधिनियम का पुरजोर विरोध करती है और इसके खिलाफ प्रदर्शन जारी रखेगी।

हालांकि, भारतीय जनता पार्टी के विधायक बाबू सिंह ने इन आरोपों को खारिज कर दिया और विपक्ष पर नए खनन कानूनों को लेकर लोगों को ‘गुमराह’ करने का आरोप लगाया।

भाषा प्रशांत अविनाश

अविनाश


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