पन्ना, 21 सितंबर (भाषा) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में निर्माणाधीन मझगांय एवं रुंज मध्यम सिंचाई परियोजना से प्रभावित किसानों और आदिवासियों ने सांकेतिक चिता प्रदर्शन और जल सत्याग्रह के बाद ‘मिट्टी सत्याग्रह’ शुरू कर सरकार और प्रशासन पर दबाव तेज कर दिया।
इसके बाद प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को आगामी 10 अक्टूबर तक मुआवजा राशि वितरित करने के निर्देश जारी किए।
पन्ना के अजयगढ़ क्षेत्र के मझगांय बांध बनहरीकला टपरियन पर उचित मुआवजा, पुनर्वास और अधिकारों की मांग को लेकर पिछले 10 दिन से जारी आंदोलन को केन-बेतवा लिंक परियोजना और ललितपुर-सिंगरौली रेल मार्ग के प्रभावितों का भी समर्थन मिला है।
आंदोलनकारियों ने रविवार देर रात तक मशालों के साथ प्रदर्शन भी किया।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर ने सोमवार को संवाददाताओं से बातचीत में आरोप लगाया कि प्रशासन आंदोलन को रोकने के लिए नोटिस और अन्य कार्रवाई के जरिये दबाव बना रहा है।
उन्होंने कहा, “प्रशासनिक दबाव के बावजूद प्रभावित परिवारों का आंदोलन जारी रहेगा।”
भटनागर ने आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासनिक कार्रवाई के जरिये लोकतांत्रिक आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, “आंदोलन किसी व्यक्ति या अधिकारी के खिलाफ नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों के अधिकार, मुआवजे और पुनर्वास की मांगों को लेकर है।”
भटनागर ने मझगांय परियोजना से संबंधित निर्माण, मुआवजा और पुनर्वास प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग भी की।
आंदोलनकारियों के मुताबिक, ‘मिट्टी सत्याग्रह’ के जरिये प्रभावित परिवार उस जमीन से अपने भावनात्मक और जीवनगत जुड़ाव को सामने रख रहे हैं, जिस पर वे पीढ़ियों से निर्भर रहे हैं।
एक आंदोलनकारी ने कहा, “हम इसी मिट्टी में जन्मे हैं। यह हमारे पुरखों की जमीन है और सरकार इसे ‘लूटना’ चाहती है। हम ऐसा नहीं होने देंगे। अपने हक के लिए हम अपनी जान की बाजी लगा देंगे।”
उसने कहा, “पहले हमने सांकेतिक चिता प्रदर्शन किया और उसके बाद जल सत्याग्रह किया, लेकिन सरकार और प्रशासन ने इसे नजरअंदाज किया। अब हमने ‘मिट्टी सत्याग्रह’ शुरू किया है।”
भटनागर ने आंदोलन के दौरान रमिया बाई की मौत का जिक्र करते हुए कहा कि मामले में परिवार को मुआवजे मिलने के साथ-साथ लंबित अधिकारों और पुनर्वास की स्थिति की भी जांच की जानी चाहिए।
आदिवासी महिला रमिया बाई (75) गत 12-13 सितंबर को आंदोलन में शामिल हुई थीं और अपने घर लौट जाने के बाद कथित तौर पर तबीयत बिगड़ने से उनकी मौत हो गई।
आंदोलनकारियों का कहना है कि रमिया बाई की मौत प्रदर्शन के दौरान हुई, जबकि अधिकारियों ने इसे सामान्य मौत बताया है।
अधिकारियों के अनुसार, “रमिया बाई की मौत के कारण की पुष्टि मामले की जांच के बाद ही हो सकेगी।”
भटनागर ने बताया कि अब इस आंदोलन को केन-बेतवा लिंक परियोजना और ललितपुर-सिंगरौली सहित पन्ना की विभिन्न परियोजनाओं से प्रभावित लोगों का भी समर्थन मिला है और वे धीरे-धीरे इसमें शामिल होने लगे हैं।
आंदोलन के बढ़ते दायरे को देखते हुए राज्य के जनसंपर्क विभाग ने सागर के आयुक्त दिलीप कुमार का शुक्रवार को एक वीडियो जारी किया, जिसमें उन्होंने मझगांय एवं रुंज मध्यम सिंचाई परियोजना से प्रभावित बालूपुर, कुंवरपुर सहित अन्य परिवारों को आगामी 10 अक्टूबर तक मुआवजा राशि वितरित करने का निर्देश दिया।
इस निर्देश के बाद पन्ना जिला प्रशासन ने विस्थापित गांवों में मुआवजा वितरण व्यवस्थित रूप से करने के लिए काम शुरू कर दिया है।
भटनागर ने कहा कि वह इस पहल का स्वागत करते हैं और इसके आधार पर सबकी सहमति से आगे आंदोलन की रुपरेखा तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि सब कुछ अनुरूप नहीं हुआ, तो यह आंदोलन और तेज होगा।
भाषा
सं ब्रजेन्द्र पारुल
पारुल