एमसीडी वार्ड समिति चुनाव: आप और भाजपा ने एक दूसरे के पार्षदों के पाला बदलने का दावा किया

एमसीडी वार्ड समिति चुनाव: आप और भाजपा ने एक दूसरे के पार्षदों के पाला बदलने का दावा किया

एमसीडी वार्ड समिति चुनाव: आप और भाजपा ने एक दूसरे के पार्षदों के पाला बदलने का दावा किया
Modified Date: August 30, 2024 / 07:39 pm IST
Published Date: August 30, 2024 7:39 pm IST

नयी दिल्ली, 30 अगस्त (भाषा) दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की जोन स्तरीय वार्ड समितियों के चुनाव में महज कुछ दिन रह गए हैं। इस बीच, निकाय में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक दूसरे के पार्षदों के बारे में दावा किया है कि वे पाला बदलने को तैयार हैं।

एमसीडी ने काफी समय से लंबित वार्ड समिति चुनाव के लिए बुधवार को मतदान कराने की घोषणा की क्योंकि स्थायी समिति के गठन के लिए यह चुनाव जरूरी है। स्थायी समिति निगम का निर्णय लेने वाला सर्वोच्च निकाय है जो पांच करोड़ रुपये या उससे अधिक के व्यय प्रस्तावों को मंजूरी देने के लिए अहम है।

निगम के 12 जोन में वार्ड समिति के चुनाव चार सितंबर को गुप्त मतपत्र के माध्यम से होंगे।

‘आप’ के वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा है कि अगले कुछ दिनों में छह पार्षदों के पार्टी में शामिल होने की संभावना है।

पार्टी को तब झटका लगा था कि जब उसके पांच पार्षद रविवार को भाजपा में चले गये थे।

आप पदाधिकारी ने कहा, ‘‘भाजपा के कुछ पार्षद अगले कुछ दिनों में हमारी पार्टी में शामिल हो जाएंगे। हमारे दो पार्षद पार्टी में वापस आ रहे हैं, जबकि कम से कम चार भाजपा पार्षद हमारे साथ आ सकते हैं।’’

भाजपा में शामिल होने वाले पार्षद रामचंद्र (वार्ड 28), पवन सहरावत (वार्ड 30), ममता पवन (वार्ड 177), सुगंधा बिधूड़ी (वार्ड 178) और मंजू निर्मल (वार्ड 180) हैं।

हालांकि उनमें से एक पार्षद रामचंद्र बृहस्पतिवार को आप में लौट आये। दल-बदल कानून फिलहाल एमसीडी में प्रभावी नहीं है।

प्रदेश भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि जो पार्षद अपने वार्ड में विकास चाहते हैं वे भाजपा की ओर आशाभरी निगाहों से देख रहे हैं क्योंकि आप के ‘भ्रष्टाचार’ से निकाय के काम बाधित हुए हैं।

उन्होंने कहा कि हाल ही में आप के पांच पार्षदों ने पार्टी छोड़ दी क्योंकि वे वहां ‘‘भ्रष्टाचार के कारण घुटन’’’ महसूस कर रहे थे।

उन्होंने कहा, ‘‘आप के कई ऐसे पार्षद हैं जो पार्टी की कार्यशैली से हताश हो गये हैं और वे पहली ही बार में पार्टी छोड़ने की सोच रहे हैं। दिल्ली की जनता के लिए काम करने की इच्छा रखने वालों के लिए हमारे दरवाजे खुले हैं।’’

भाषा

राजकुमार धीरज

धीरज


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