शिलांग, 31 मई (भाषा) मेघालय सरकार ने आरक्षण के मौजूदा फॉर्मूले में बदलाव की मांग को लेकर विपक्षी दल वॉयस ऑफ द पीपुल्स पार्टी (वीपीपी) द्वारा आयोजित अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की पृष्ठभूमि में राज्य में आरक्षण नीति की समीक्षा के लिए एक समिति का पुनर्गठन किया है। एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि समिति का पुनर्गठन मंगलवार को किया गया और वह इस मुद्दे पर बुधवार को राजनीतिक दलों के साथ बैठक करेगी।
समिति की अध्यक्षता राज्य की कानून मंत्री अम्पारीन लिंगदोह करेंगी।
उपमुख्यमंत्री स्नियाभलंग धर ने बुधवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि आरक्षण नीति पर मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा द्वारा बैठक के आयोजन के बाद इस पर फैसला लिया जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘मुद्दा संवेदनशील है और इस पर विस्तार से चर्चा करने की जरूरत है। सड़कों पर इसके बारे में चर्चा नहीं की जा सकती है, लेकिन मिल बैठकर इस पर चर्चा की जा सकती है…। सरकार लोगों और राज्य के सर्वश्रेष्ठ हित को ध्यान में रखकर फैसला करेगी।’’
उन्होंने दावा किया कि वीपीपी आरक्षण का मुद्दा उठा रही है जिसे अन्य पार्टियों का समर्थन नहीं है।
पार्टी राज्य में मौजूद ‘‘पुरानी और पक्षपातपूर्ण’’ रोजगार आरक्षण नीति की समीक्षा की मांग कर रही है। इस मुद्दे पर यहां पार्टी के अध्यक्ष आर्डेंट बसाइवमोइत की भूख हड़ताल का बुधवार को नौवां दिन है।
मेघालय में 60 सदस्यीय विधानसभा में पार्टी के चार विधायक हैं और वह खासी-जयंतिया समुदाय और गारो समुदायों के लिए 40:40 के अनुपात में आरक्षण की समीक्षा की मांग कर रहे हैं। पार्टी का दावा है कि खासी समुदाय के लोगों की आबादी बढ़ी है और इसलिए नीति की समीक्षा किए जाने की आवश्यकता है।
समिति ने आंदोलनरत वीपीपी विधायकों को बुधवार को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है, जिन्होंने इसे तुरंत खारिज कर दिया।
भाषा सुरभि धीरज
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