मेघालय सरकार ने असम के साथ सीमा विवाद सुलझाने के लिए समितियों का पुनर्गठन किया

मेघालय सरकार ने असम के साथ सीमा विवाद सुलझाने के लिए समितियों का पुनर्गठन किया

मेघालय सरकार ने असम के साथ सीमा विवाद सुलझाने के लिए समितियों का पुनर्गठन किया
Modified Date: June 30, 2026 / 09:42 pm IST
Published Date: June 30, 2026 9:42 pm IST

शिलांग, 30 जून (भाषा)मेघालय सरकार ने असम के साथ सीमा विवाद के छह अनसुलझे इलाकों का आकलन करने के लिए तीन क्षेत्रीय समितियों का पुनर्गठन किया। इन इलाकों में पश्चिमी खासी पवर्तीय जिले का हिंसा-प्रभावित लैंगपिह और पश्चिमी जयंतिया पवर्तीय जिले का लापांगप-मुकरोह क्षेत्र शामिल हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि समितियों को जमीनी सर्वेक्षण कर 45 दिनों के भीतर अपनी सिफारिशें सौंपने का निर्देश दिया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि इस कदम का उद्देश्य मार्च 2022 में मेघालय और असम सरकारों के बीच पहले समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद, सीमा विवाद सुलझाने की प्रक्रिया के दूसरे चरण में तेजी लाना है।

इस समझौता ज्ञापन में, विवाद वाले 12 इलाकों में से छह इलाकों – ताराबारी, गिजांग, हाहीम, बोकलापाड़ा, खानापाड़ा-पिलांगकाटा और राटाचेरा – से जुड़े लगभग 36.79 वर्ग किलोमीटर विवादित क्षेत्र का मुद्दा सुलझा लिया गया था।

करार के तहत मेघालय को लगभग 18.51 वर्ग किलोमीटर मिला, जबकि असम के पास लगभग 18.28 वर्ग किलोमीटर रहा।

बाकी छह इलाकों – लैंगपिह, बोरदुआर, नोंगवाह-मावटामुर, देशदूनरेह, ब्लॉक-2, और ब्लॉक-1/प्सियार-खंडुली (जिसमें लापांगप-मुकरोह सेक्टर भी शामिल है) — को दूसरे चरण में सुलझाने का प्रस्ताव है।

मुख्य सचिव डॉ. शकील पी. अहमद द्वारा मंगलवार को जारी एक अधिसूचना ने 20 मार्च, 2023 को जारी पिछले आदेश की जगह ली।

उप मुख्यमंत्री प्रेस्टोन तिनसॉन्ग, रि-भोई ज़िले के विवादित ब्लॉक-2 इलाके की जमीनी स्थिति का आकलन करने वाली क्षेत्रीय समिति की अध्यक्षता करेंगे।

ऊर्जा मंत्री मेटबाह लिंगदोह लैंगपिह के लिए बनी समिति की अगुवाई करेंगे, जबकि उप मुख्यमंत्री स्नियावभालंग धर पश्चिमी जयंतिया पर्वतीय सेक्टर के लिए बनी समिति के प्रमुख होंगे। इस सेक्टर में ब्लॉक-1 और सियार-खंडुली के साथ-साथ लापांगप-मुकरोह इलाका भी शामिल है।

एक विज्ञप्ति के मुताबिक इन समितियों को असम में अपने समकक्षों के साथ मिलकर संयुक्त जमीनी सर्वेक्षण करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

विज्ञप्ति में कहा गया कि समितियां विवादित क्षेत्र के गांवों के रिकॉर्ड की जांच करेंगी, आबादी और इतिहास से जुड़े सबूतों का आलकन करेंगी, सार्वजनिक संपत्तियों की सूची तैयार करेंगी और निवासियों व संबंधित पक्षकारों से संवाद करेंगी।

भाषा धीरज नरेश

नरेश


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