मेकेदातु: माकपा ने केंद्रीय मंत्री का बयान वापस लेने की मांग की, दो अगस्त को प्रदर्शन

मेकेदातु: माकपा ने केंद्रीय मंत्री का बयान वापस लेने की मांग की, दो अगस्त को प्रदर्शन

मेकेदातु: माकपा ने केंद्रीय मंत्री का बयान वापस लेने की मांग की, दो अगस्त को प्रदर्शन
Modified Date: July 29, 2026 / 03:38 pm IST
Published Date: July 29, 2026 3:38 pm IST

चेन्नई, 29 जुलाई (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की तमिलनाडु इकाई ने मेकेदातु परियोजना पर राज्यसभा में एक केंद्रीय मंत्री के उस बयान को लेकर बुधवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा जिसमें कहा गया था कि कर्नाटक को मेकेदातु बांध बनाने के लिए निचले राज्यों की सहमति की आवश्यकता नहीं है।

वाम दल ने इस बयान को ‘‘राज्य के कृषि हितों के साथ धोखा’’ बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है। माकपा ने कावेरी डेल्टा के जिलों में दो अगस्त को एक बड़े विरोध प्रदर्शन की घोषणा भी की।

माकपा के राज्य सचिव पी. षणमुगम ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हम मंत्री के बयान की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। इस जवाब ने पूरे तमिलनाडु के किसानों और जनता को स्तब्ध कर दिया है।’’

मार्क्सवादी नेता ने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक स्वीकृत नियम है कि ऊपरी राज्य अंतर-राज्यीय नदियों से जुड़े विवादों पर एकतरफा निर्णय नहीं ले सकते।

उन्होंने यह भी कहा, ‘‘केंद्रीय राज्य मंत्री (राज भूषण चौधरी) इस सिद्धांत से अनजान नहीं हैं।’’

षणमुगम ने दावा किया कि कर्नाटक सरकार ने कावेरी न्यायाधिकरण के फैसले और अंतर-राज्यीय नदी विवाद पर उच्चतम न्यायालय के अंतिम फैसले के तहत तमिलनाडु के लिए निर्धारित पानी का मासिक कोटा कभी जारी किया ही नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘इसके बजाय, कर्नाटक ने तमिलनाडु के साथ हमेशा उस जल निकासी बेसिन जैसा व्यवहार किया है, जिसका उपयोग भारी बारिश के समय अतिरिक्त पानी निकालने के लिए किया जाता है।’’

उन्होंने आगे कहा, ‘‘इन परिस्थितियों में, मेकेदातु बांध का निर्माण तमिलनाडु को उसके पानी के कानूनी अधिकार से वंचित करने का एक स्पष्ट जोखिम पैदा करता है, जिससे यह क्षेत्र रेगिस्तान में बदल सकता है।’’

उन्होंने यह भी कहा कि इससे पूरे राज्य में पेयलजल की आपूर्ति और सिंचाई व्यवस्था गंभीर रूप से प्रभावित होगी।

षणमुगम ने यह भी कहा कि माकपा केंद्र सरकार से यह मांग करती है कि वह तमिलनाडु सहित निचले राज्यों के अधिकारों की रक्षा के लिए उचित कदम उठाए।

भाषा सुरेश नरेश

नरेश


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