गलत तरीके से बर्खास्त न्यायिक अधिकारी पदोन्नति वाले वेतनमान से वंचित नहीं किये जा सकते: न्यायालय

गलत तरीके से बर्खास्त न्यायिक अधिकारी पदोन्नति वाले वेतनमान से वंचित नहीं किये जा सकते: न्यायालय

गलत तरीके से बर्खास्त न्यायिक अधिकारी पदोन्नति वाले वेतनमान से वंचित नहीं किये जा सकते: न्यायालय
Modified Date: July 29, 2026 / 08:44 pm IST
Published Date: July 29, 2026 8:44 pm IST

नयी दिल्ली, 29 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि किसी न्यायिक अधिकारी को गलत तरीके से सेवा से हटाए जाने के बाद यदि उसे दोबारा बहाल किया जाता है, तो केवल इस वजह से उसे करियर में पदोन्नति से जुड़े लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता कि बीच की अवधि की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) उपलब्ध नहीं है।

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि कोई नियोक्ता अपनी ही गलत कार्रवाई का लाभ नहीं उठा सकता। शीर्ष अदालत ने कहा कि संबंधित अधिकारी की पात्रता का आकलन उपलब्ध अन्य वैध वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) के आधार पर किया जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने यह आदेश राजस्थान उच्च न्यायालय की ओर से दायर एक आवेदन पर सुनवाई के दौरान दिया। आवेदन में यह स्पष्ट करने का अनुरोध किया गया था कि क्या शीर्ष अदालत के वर्ष 2022 के उस आदेश के तहत, जिसमें राजस्थान के न्यायिक अधिकारी अभय जैन को सेवा में निरंतरता, वरिष्ठता और अन्य परिणामी लाभों के साथ बहाल किया गया था, उन्हें उच्च वेतनमान का लाभ भी मिलेगा, जबकि सेवा से बाहर रहने के छह वर्षों की अवधि की एसीआर उपलब्ध नहीं है।

अदालत ने फैसला सुनाया कि जैन 16 जुलाई, 2018 से चयन वेतनमान और 16 जुलाई, 2021 से विशेष उच्च वेतनमान के हकदार हैं। इसके साथ ही उन्हें इससे जुड़े अन्य सभी परिणामी लाभ भी दिए जाएंगे।

जैन को वर्ष 2013 में न्यायिक अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया था, लेकिन 2016 में उन्हें सेवा से हटा दिया गया। मार्च 2022 में उच्चतम न्यायालय ने सेवा से हटाने के आदेश को रद्द कर दिया और उन्हें सेवा में निरंतरता तथा वरिष्ठता के साथ दोबारा बहाल करने का निर्देश दिया। साथ ही, अदालत ने उन्हें 50 प्रतिशत बकाया वेतन देने का आदेश भी दिया।

बहाली के बाद राजस्थान उच्च न्यायालय ने जैन के मामले पर चयन वेतनमान और विशेष उच्च वेतनमान (सुपर टाइम स्केल) के लिए विचार किया, लेकिन उसने उच्चतम न्यायालय से स्पष्टीकरण मांगा, क्योंकि वर्ष 2016 से 2021 के बीच की अवधि की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) उपलब्ध नहीं थी। इसका कारण यह था कि उस दौरान जैन ने न्यायिक कार्य नहीं किया था।

भाषा अमित सुरेश

सुरेश


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