मेस्सी कार्यक्रम विवाद: कोच्चि में ‘रिपोर्टर टीवी’ के दफ्तर में पुलिस की तलाशी

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मेस्सी कार्यक्रम विवाद: कोच्चि में ‘रिपोर्टर टीवी’ के दफ्तर में पुलिस की तलाशी

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  • Publish Date - September 16, 2026 / 12:00 PM IST,
    Updated On - September 16, 2026 / 12:00 PM IST

कोच्चि, 16 सितंबर (भाषा) मलयालम समाचार चैनल ‘रिपोर्टर टीवी’ के कोच्चि स्थित मुख्यालय में बुधवार तड़के पुलिस की एक टीम ने तलाशी ली। चैनल ने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई से उसके समाचार संचालन में बाधा पहुंची।

चैनल के अनुसार, पुलिसकर्मी पत्रकारों और अन्य कर्मचारियों के मोबाइल फोन अपने साथ ले गए।

तलाशी अभियान का नेतृत्व कर रहे त्रिक्काकरा के सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) ने आरोप लगाया कि चैनल तलाशी प्रक्रिया में सहयोग नहीं कर रहा था।

अधिकारी ने मीडिया को बताया कि कार्यालय में मौजूद चैनल के कर्मचारियों ने प्रशासनिक ब्लॉक की तलाशी के लिए दिए गए नोटिस को स्वीकार नहीं किया और न ही तलाशी के लिए मौखिक अनुरोधों पर सहमति दी।

उन्होंने कहा कि चैनल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जल्द कार्यालय पहुंचने का आश्वासन दिया था, लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने पुलिस के फोन उठाना बंद कर दिया।

चैनल के मुताबिक, तलाशी न्यूज़ डेस्क पर ली गई जहां सामान्य तौर पर केवल पत्रकार और तकनीकी कर्मचारी काम करते हैं।

चैनल ने आरोप लगाया कि अधिकारी आधे घंटे से अधिक समय तक कार्यालय में मौजूद रहे, लेकिन तलाशी का कारण या अन्य विवरण स्पष्ट नहीं किया। साथ ही ड्यूटी पर आए पत्रकारों के निजी इस्तेमाल वाले मोबाइल फोन भी कथित तौर पर कब्जे में ले लिए गए।

एसीपी ने कहा कि यह कार्रवाई केरल में पिछली वामपंथी सरकार के दौरान हुए मेस्सी-अर्जेंटीना फुटबॉल कार्यक्रम के विफल होने से सरकार को कथित तौर पर हुए नुकसान मामले की जांच के सिलसिले में की जा रही है।

चैनलों पर प्रसारित तस्वीरों में दिखाई दिया कि बाद में चैनल के प्रशासनिक अधिकारी कार्यालय पहुंचे और तलाशी के लिए प्रशासनिक प्रकोष्ठ खोल दिया।

बताया जा रहा है कि विशेष जांच दल (एसआईटी) पांच स्थानों पर तलाशी ले रहा है। इनमें कोच्चि में ‘रिपोर्टर ब्रॉडकास्टिंग कंपनी’ के मालिक ऑगस्टीन बंधुओं के आवास, कंपनी का कार्यालय और वायनाड स्थित उनका पारिवारिक आवास शामिल हैं।

चैनल ने आरोप लगाया कि तलाशी का उद्देश्य उसके प्रसारण में बाधा डालना है।

विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए आरोप लगाया कि न्यूज़ डेस्क में आना और पत्रकारों के फोन जब्त करना मीडिया की स्वतंत्रता पर हमला है।

एक बयान में विजयन ने कहा कि पुलिसकर्मी तड़के ‘‘न्यूज़ डेस्क तक आ गए’’ और करीब डेढ़ घंटे तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने पत्रकारों की वीडियो रिकॉर्डिंग की।

विजयन ने इस कार्रवाई की तुलना अन्य राज्यों और दिल्ली में मीडिया संगठनों से जुड़े मामलों से की और कहा कि मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन और गृह मंत्री रमेश चेन्निथला को इस कथित मीडिया स्वतंत्रता पर हमले को लेकर अपना जवाब देना चाहिए।

भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी (भाकपा) के राज्य सचिव बिनॉय विश्वम और पार्टी के विधायक दल के नेता के. राजन ने भी पुलिस कार्रवाई की निंदा की।

उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत मिली प्रेस की स्वतंत्रता तथा बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में बाधा नहीं डाली जा सकती। उन्होंने चैनल और उसके पत्रकारों को अपना समर्थन भी दिया।

विश्वम ने कहा कि मुख्यमंत्री को संविधान पढ़ना चाहिए।

राजन ने कहा कि सतीशन को तुरंत हस्तक्षेप कर इस घटनाक्रम पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘ यह प्रशासनिक आतंक है। अगर कुछ नहीं किया गया तो यह एक मिसाल बन जाएगा। इस तरह किसी चैनल के प्रसारण में बाधा डालना अस्वीकार्य और अभूतपूर्व है।’’

केरल के डीजीपी रवाड़ा ए. चंद्रशेखर ने कहा, ‘‘तलाशी, अदालत द्वारा जारी तलाशी वारंट के आधार पर कानून के अनुसार की गई।’’

उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘‘ तलाशी का फैसला एसआईटी ने लिया था। मैंने चैनल के प्रसारण में कोई रुकावट नहीं देखी, क्योंकि उस समय प्रसारण जारी था।’’ मार्क्सवादी कम्युनिष्ट पार्टी (माकपा) के सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि केरल के इतिहास में ऐसा पहले नहीं हुआ।

उन्होंने एक चैनल से कहा, ‘‘इसका उद्देश्य पत्रकारों में डर पैदा करना है। उन्हें प्रशासनिक प्रकोष्ठ में जाना चाहिए था, न्यूज़ डेस्क में नहीं।’’

भाषा शोभना मनीषा

मनीषा