नयी दिल्ली, 15 सितंबर (भाषा) मेटा कंपनी बाल यौन शोषण से जुड़े मामलों की सूचना उचित कानून प्रवर्तन एजेंसियों को देने पर सहमत हो गई है। सरकारी सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि भारत में संचालित किसी भी सोशल मीडिया मंच के लिए बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा एक ‘‘मौलिक सिद्धांत’’ है और इस पर बिल्कुल भी ‘‘समझौता नहीं किया जा सकता।’’
सूत्रों ने नाबालिगों को हानिकारक सामग्री और गतिविधियों से बचाने में डिजिटल मंचों की जिम्मेदारी पर सरकार के कड़े रुख को रेखांकित करते हुए कहा कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए उचित कदम नहीं उठाने वाले मंचों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सूत्रों ने कहा कि सरकार अन्य ऑनलाइन मंचों के साथ भी लगातार बातचीत कर रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे हानिकारक सामग्री की सक्रिय रूप से पहचान करें और उसे हटाएं।
सूत्रों के अनुसार, मेटा बाल यौन शोषण के मामलों की सूचना कानून प्रवर्तन एजेंसियों को देने पर सहमत हो गया है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन मंचों को बच्चों के लिए सुरक्षित बनाने की दिशा में यह पहला कदम है और इस दिशा में अभी बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है।
सरकार ने बाल यौन शोषण सामग्री, ‘डीपफेक’ सहित हानिकारक और ऑनलाइन अवैध सामग्री को लेकर सोशल मीडिया मंचों पर निगरानी बढ़ा दी है।
सरकार ने ऐसी सामग्री से निपटने के तरीके को लेकर मेटा को एक नोटिस भी जारी किया था और हाल ही में इस सोशल मीडिया कंपनी के शीर्ष अधिकारियों को भारत तलब किया था।
केंद्र सरकार ने हानिकारक सामग्री को तेजी से हटाने, कड़े सुरक्षा उपाय करने और अधिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सभी मंचों पर दबाव बढ़ाया है। साथ ही, उन्हें स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि भारतीय कानून का पालन नहीं करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
भाषा खारी वैभव
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