दिल्ली में बिहार, उत्तर प्रदेश के प्रवासी मतदाताओं को बड़े पैमाने पर मतदाता सूची से हटाया गया : आप

दिल्ली में बिहार, उत्तर प्रदेश के प्रवासी मतदाताओं को बड़े पैमाने पर मतदाता सूची से हटाया गया : आप

दिल्ली में बिहार, उत्तर प्रदेश के प्रवासी मतदाताओं को बड़े पैमाने पर मतदाता सूची से हटाया गया : आप
Modified Date: August 19, 2026 / 09:47 pm IST
Published Date: August 19, 2026 9:47 pm IST

नयी दिल्ली, 19 अगस्त (भाषा) आम आदमी पार्टी (आप) ने बुधवार को आरोप लगाया कि दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत बिहार और उत्तर प्रदेश से आए प्रवासी मतदाताओं को मतदाता सूची से ‘बड़े पैमाने पर हटाया’ गया है।

आप विधायक संजीव झा का यह आरोप दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय द्वारा सोमवार को दी गई जानकारी के बाद आया है।

सीईओ कार्यालय ने बताया था कि शहर में कुल 1.45 करोड़ मतदाताओं में से 97.47 लाख मतदाताओं ने अपने गणना प्रपत्र जमा किए हैं, जिन्हें सभी विधानसभा क्षेत्रों में बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) ने डिजिटल रूप में दर्ज किया है। यह संख्या कुल मतदाताओं की 67.18 प्रतिशत है। गणना प्रपत्र जमा करने की अंतिम तारीख 17 अगस्त थी।

संजीव झा ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया के तहत हटाए गए अधिकतर मतदाता बिहार और उत्तर प्रदेश से आए प्रवासी हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘इनमें ज्यादातर नाम अनुपस्थित और स्थानांतरित श्रेणी के तहत हटाए गए हैं। अनधिकृत कॉलोनियों और झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों में पहचान को लेकर कई समस्याएं हैं। बीएलओ ने अपना काम ठीक से नहीं किया है। ऐसा लगता है कि निर्वाचन आयोग ने जानबूझकर उनके नाम सूची से हटाए हैं।’’

बुराड़ी से विधायक झा ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने पहले निर्वाचन आयोग के साथ हुई बैठक में उन नामों का आंकड़ा मांगा था, जिन्हें अनुपस्थित और स्थानांतरित श्रेणी के तहत मसौदा मतदाता सूची से हटाया गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘लोगों के मतदान के अधिकार को बनाए रखा जाना चाहिए। मौजूदा एसआईआर प्रक्रिया समावेश की नहीं, बल्कि बहिष्कार की प्रक्रिया है। हमने सुझाव दिया था कि जिन क्षेत्रों में 50 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, वहां बीएलओ की राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ अलग बैठक कराई जाए। निर्वाचन आयोग ने इस पर सहमति जताई थी, लेकिन बाद में हमें कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया गया और न ही कोई बैठक बुलाई गई। यह जानबूझकर किया जा रहा है।’’

आम आदमी पार्टी के नेता ने कहा कि निर्वाचन आयोग को इस प्रक्रिया पर पुनर्विचार करना चाहिए, अन्यथा बड़ी संख्या में लोग मतदान प्रक्रिया से वंचित हो जाएंगे।

एसआईआर के तहत घर-घर सत्यापन अभियान 30 जून को शुरू हुआ था और 17 अगस्त को समाप्त हुआ। इस दौरान 1.45 करोड़ मतदाताओं में से 47 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जाने की संभावना है, क्योंकि या तो उन्होंने गणना प्रपत्र जमा नहीं किए हैं या उन्हें ‘एएसडीडी’ (अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहरी प्रविष्टि वाले मतदाता) की श्रेणी में चिह्नित किया गया है।

सत्यापन अभियान के दौरान 30 जून से 17 अगस्त के बीच बीएलओ ने प्रत्येक मतदाता को गणना प्रपत्र उपलब्ध कराए थे। जिन मतदाताओं ने गणना प्रपत्र जमा नहीं किए हैं, वे 24 अगस्त से 23 सितंबर के बीच दावे और आपत्तियों की अवधि के दौरान प्रपत्र-6 जमा कर सकेंगे।

भाषा रवि कांत रवि कांत वैभव

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