आइजोल, 27 जुलाई (भाषा) मिजोरम में 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राज्य में अपने दम पर अगली सरकार बनाने के प्रयास में जातीय अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में अपना आधार मजबूत कर रही है। वर्तमान में मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) की सरकार है जो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का घटक है।
पार्टी काफी आशावादी है। हालांकि, उसे सरकार बनाने के लिए 40 सदस्यीय विधानसभा में अपनी संख्या मौजूदा एक से बढ़ाकर कम से कम 21 तक करनी होगी।
इस बड़ी छलांग को संभव बनाने में मदद करने के लिए, भाजपा पूर्वोत्तर राज्य के कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में अपना आधार मजबूत कर रही है जहां ब्रू और चकमा जैसे जातीय अल्पसंख्यक बड़ी संख्या में हैं।
भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष वनलल्ह्मुआका ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘हमारे पास अपनी पार्टी को मजबूत करने के लिए पर्याप्त समय है और हम आगामी विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन को लेकर आश्वस्त हैं।’’
यह पूछे जाने पर कि वह कितनी सीट जीतने की उम्मीद कर रहे हैं, उन्होंने सीधा जवाब देने से परहेज किया और कहा, ‘हम अगली सरकार बनाने की तैयारी कर रहे हैं।’
पूर्वोत्तर क्षेत्र के आठ राज्यों में से अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर और त्रिपुरा में भाजपा की सरकार है, जबकि मिजोरम समेत बाकी चार राज्यों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से जुड़े दल सत्ता में हैं।
इस क्षेत्र में कांग्रेस का आखिरी गढ़ मिजोरम 2018 के विधानसभा चुनाव में गिर गया था और एमएनएफ 28 सीटों पर जीतकर सत्ता में आई थी। भाजपा ने अपना खाता खोलते हुए एक सीट पर जीत हासिल की थी।
वनलल्ह्मुआका ने कहा, ‘‘हम पार्टी को मजबूत बनाने के लिए सक्रिय अभियान चला रहे हैं।’’
भाजपा के एक अन्य वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी विशेष रूप से उन निर्वाचन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रही है जहां गैर मिजो-जातीय अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की बहुलता है।
पार्टी के एक सूत्र ने कहा कि एमएनएफ समेत अन्य दलों के कुछ विधायक चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हो सकते हैं।
भाषा नेत्रपाल अमित
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