आइजोल, आठ अगस्त (भाषा) मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) के पूर्व सदस्यों से जुड़े दो संगठनों ने मुख्यमंत्री लालदुहोमा की 1986 के मिजोरम शांति समझौते और इनर लाइन परमिट (आईएलपी) पर हाल की टिप्पणियों की शनिवार को कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि लालदुहोमा ने कई लोगों की कुर्बानियों के बाद हुए इस समझौते को कमतर आंका है।
पूर्व मिजो नेशनल आर्मी (एमएनए) की समन्वय समिति के अध्यक्ष वनलालबिया और ‘पीस एकॉर्ड एमएनएफ रिटर्नीज एसोसिएशन’ (पीएएमआरए) ने कहा कि शांति समझौते से मिजोरम में शांति स्थापित हुई और आज राज्य के लोग इसके लाभ उठा रहे हैं।
उन्होंने लालदुहोमा पर बार-बार ऐसे बयान देने का आरोप लगाया, जिनसे कथित तौर पर मिजोरम शांति समझौते के महत्व को कमतर आंका गया।
वनलालबिया 31 जुलाई को मिजोरम लॉ कॉलेज में छात्रों को संबोधित करते हुए लालदुहोमा द्वारा कथित तौर पर की गई टिप्पणियों का जिक्र कर रहे थे। लालदुहोमा ने कथित तौर पर कहा था कि आमतौर पर इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द ‘मिजोरम एकॉर्ड’ तकनीकी रूप से सही नहीं है, क्योंकि यह समझौता भारत सरकार और मिजोरम राज्य के बीच नहीं, बल्कि केंद्रीय गृह मंत्रालय और मिजोरम के एक राजनीतिक संगठन एमएनएफ के बीच हुआ था।
लालदुहोमा ने कथित तौर पर कहा था कि ‘इनर लाइन परमिट’ (आईएलपी) को जारी रखना अंततः केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में है और यदि केंद्र चाहे तो उसे इस व्यवस्था को समाप्त करने का अधिकार है।
वनलालबिया ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘अगर मुख्यमंत्री शांति समझौते को सही ढंग से समझ नहीं सकते, उसका प्रभावी इस्तेमाल नहीं कर सकते और उसकी रक्षा नहीं कर सकते, तो उन्हें अपने पास मौजूद सत्ता किसी और को सौंप देनी चाहिए।’’
वनलालबिया ने आरोप लगाया कि लालदुहोमा ने कहा था कि यह समझौता मिजोरम सरकार और भारत सरकार के बीच नहीं, बल्कि एमएनएफ और भारत सरकार के बीच हुआ था और इसलिए, उनके अनुसार यह मिजोरम और भारत के बीच कोई समझौता नहीं था।
लालदुहोमा के दावों को खारिज करते हुए, उन्होंने कहा कि इस दस्तावेज पर एमएनएफ की ओर से लालडेंगा, केंद्र सरकार की ओर से तत्कालीन केंद्रीय गृह सचिव के. डी. प्रधान और मिजोरम सरकार की ओर से तत्कालीन मुख्य सचिव लालखामा के हस्ताक्षर हैं।
वनलालबिया ने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में लालदुहोमा से अपेक्षा की जाती है कि मिजोरम और उसके लोगों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर वह जनता के सामने मजबूती से अपना पक्ष रखें।
भाषा देवेंद्र दिलीप
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