मिज़ोरम शांति समझौता सुलह और शांति स्थापना का वैश्विक मॉडल : राज्यपाल सिंह
मिज़ोरम शांति समझौता सुलह और शांति स्थापना का वैश्विक मॉडल : राज्यपाल सिंह
आइजोल, 30 जून (भाषा) मिजोरम के राज्यपाल विजय कुमार सिंह ने मंगलवार को ऐतिहासिक मिजोरम शांति समझौते की प्रशंसा करते हुए इसे सफल विवाद समाधान और शांति स्थापना के बेहतरीन वैश्विक मॉडल में से एक बताया।
उन्होंने राज्य के लोगों से अपील की कि वे उस मुश्किल से हासिल हुई शांति को बनाए रखें और मज़बूत करें, जिसने पिछले चार दशकों में राज्य की कायापलट कर दी है।
मिजोरम शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने के 40 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि यह शांति समझौता एक ऐतिहासिक उपलब्धि है और सुलह, दूरदर्शी नेतृत्व और लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता का एक शानदार उदाहरण है।
इस कार्यक्रम का आयोजन जोरम रिसर्च फ़ाउंडेशन और आइजोल क्लब ने संयुक्त रूप से किया था।
राज्यपाल ने कहा कि समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद से मिजोरम मोटे तौर पर अशांति से मुक्त रहा है, जो यहां के लोगों के सामूहिक संकल्प का प्रमाण है और इसे शांति-स्थापना के लिए विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त मॉडल बनाता है।
उन्होंने कहा,‘‘बिना किसी संशय प्रगति हो रही है। इस शांति प्रक्रिया में सभी शामिल हैं और यह उपलब्धि मिजोरम के लोगों की है।’’
राज्यपाल ने कहा कि इस समझौते ने दो दशकों से चल रहे उग्रवाद को सफलतापूर्वक समाप्त कर दिया और राज्य में स्थायी शांति, राजनीतिक स्थिरता और सामाजिक-आर्थिक विकास का मार्ग प्रशस्त किया।
मिज़ोरम शांति समझौते पर 30 जून 1986 को केंद्र सरकार और दिवंगत लालडेंगा के नेतृत्व वाले तत्कालीन भूमिगत संगठन ‘मिजो नेशनल फ्रंट’ ने हस्ताक्षर किए थे, जिससे इस क्षेत्र में दो दशकों से चल रहे उग्रवाद का अंत हुआ।
एफएनएफ की स्थापना 1959 में की गई थी। इसका मकसद 1950 के दशक के आखिर में असम राज्य के मिजो बहुल इलाकों में अकाल की स्थिति से निपटने में केंद्र सरकार की कथित निष्क्रियता का विरोध करना था।
समूह ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बाद 1966 में मिज़ो लोगों के लिए संप्रभु आज़ादी की मांग को लेकर हथियार उठा लिया। केंद्र ने इस संगठन को 1967 में गैरकानूनी घोषित कर दिया।
मई 1971 में, मिजो ज़िला परिषद के एक प्रतिनिधिमंडल ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मुलाकात की और मिजो लोगों के लिए एक अलग पूर्ण राज्य की मांग की।
केंद्र ने संगठन की मांग पर मिजो पवर्तीय क्षेत्र को केंद्र-शासित प्रदेश बनाने का प्रस्ताव रखा और जनवरी 1972 में इसपर अमल किया।
शांति समझौते के परिणामस्वरूप 20 फरवरी 1987 को मिजोरम भारत का 23वां राज्य बना।
भाषा धीरज नरेश
नरेश

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