चंडीगढ़, आठ जून (भाषा) बागी अकाली विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने सोमवार को कहा कि वह अमृतपाल सिंह के नेतृत्व वाले अकाली दल (वारिस पंजाब दे) में मंगलवार को शामिल होंगे।
अयाली ने हाल में सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व वाले शिरोमणि अकाली दल (शिअद) से अलग हुए गुट शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) को छोड़ दिया था।
उन्होंने कहा, “हम पहले से ही पंथ के एजेंडे पर काम कर रहे हैं। ‘कौम’ (सिख समुदाय) की भावना थी कि पंथ का एक नया मंच होना चाहिए।”
अयाली के इस दल में शामिल होने के दौरान अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह और फरीदकोट से सांसद सरबजीत सिंह खालसा भी मौजूद रहेंगे।
अयाली ने कहा कि आने वाले समय में और लोग भी अकाली दल (वारिस पंजाब दे) में शामिल होंगे।
अकाली दल (वारिस पंजाब दे) का गठन पिछले वर्ष किया गया था। इसके प्रमुख और खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह फिलहाल वर्ष 2023 के अजनाला पुलिस थाना हमला मामले में असम की एक जेल में बंद हैं।
दाखा विधानसभा क्षेत्र से विधायक अयाली ने 20 मई को शिअद (पुनर सुरजीत) के सभी पदों से इस्तीफा देने की घोषणा की थी।
उन्होंने उस समन्वय समिति के संयोजक पद से भी इस्तीफा दे दिया था, जिसका गठन शिअद (पुनर सुरजीत) और अकाली दल (वारिस पंजाब दे) के बीच संभावित गठबंधन की संभावनाएं तलाशने के लिए किया गया था।
पार्टी छोड़ते समय अयाली ने कहा था कि वह कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), आम आदमी पार्टी (आप) या सुखबीर बादल के नेतृत्व वाले शिरोमणि अकाली दल में शामिल नहीं होंगे।
अयाली उन सदस्यों में शामिल थे जिन्हें दो दिसंबर, 2024 को सिखों की सर्वोच्च धार्मिक पीठ अकाल तख्त के निर्देशों के अनुसार शिअद के सदस्यता अभियान को गति देने के लिए गठित समिति में शामिल किया गया था।
इस समिति को शिरोमणि अकाली दल के पुनर्गठन की निगरानी का दायित्व सौंपा गया था।
अकाल तख्त ने मूल रूप से सात सदस्यीय समिति गठित की थी, लेकिन दो सदस्यों के अलग होने के बाद यह समिति पांच सदस्यीय रह गई थी।
उसी समय अकाल तख्त ने वर्ष 2007 से 2017 के दौरान पंजाब में शिअद और उसकी सरकार द्वारा किए गए कथित “पापों” के लिए सुखबीर बादल और अन्य नेताओं को धार्मिक दंड सुनाया था।
सुखबीर बादल को ‘तनखैया’ (धार्मिक आचरण संबंधी दोषी) घोषित किया गया था। इससे पहले बागी नेताओं, जिनमें प्रेम सिंह चंदूमाजरा, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की पूर्व अध्यक्ष बीबी जागीर कौर, पूर्व विधायक गुरप्रताप सिंह वडाला और पूर्व मंत्री परमिंदर सिंह ढींडसा शामिल थे। इन सभी ने एक जुलाई 2024 को अकाल तख्त के समक्ष पेश होकर शिअद शासनकाल के दौरान हुई “गलतियों” के लिए क्षमा मांगी थी।
गौरतलब है कि पंजाब में विधानसभा चुनाव अगले वर्ष की शुरुआत में होने हैं।
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